चीन से नेपाल तक जाने वाला हाईवे शुरू, ड्रैगन की आर्मी भी करेगी इस्तेमाल

चीन से नेपाल तक जाने वाला हाईवे शुरू, ड्रैगन की आर्मी भी करेगी इस्तेमाल
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बीजिंग: चीन ने तिब्बत से हो कर नेपाल सीमा तक जाने वाला एक रणनीतिक राजमार्ग खोल दिया है जिसका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है. मीडिया की एक खबर के अनुसार, इस कदम के बारे में चीनी विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बीजिंग दक्षिण एशिया में प्रवेश करने में सक्षम होगा. तिब्बत में शिगेज हवाईअड्डे और शिगेज शहर के मध्य 40.4 किलोमीटर लंबे इस राजमार्ग को आधिकारिक तौर पर शुक्रवार (15 सितंबर) को लोगों के लिए खोल दिया गया. इस राजमार्ग का छोटा भाग इसे नेपाल सीमा से जोड़ता है.

यह राजमार्ग नागरिक और सैन्य उद्देश्य से इस्तेमाल होने वाले हवाईअड्डे और तिब्बत के दूसरे सबसे बड़े शहर के बीच दूरी को आधा घंटा कम करेगा. सरकारी ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने विशेषज्ञों को उद्धृत करते हुए कहा है कि इससे चीन दक्षिण एशिया में व्यापार और रक्षा के संदर्भ में अपनी पहुंच बढ़ा सकेगा. भौगोलिक रूप से दक्षिण एशिया तक सड़क या रेल संपर्क का कोई भी विस्तार भारत, भूटान और बांग्लादेश से हो कर जाएगा. चीनी अधिकारियों ने पहले कहा है कि परियोजनाएं व्यवहारिक हैं और अगर नयी दिल्ली साथ दे तो भारत तथा चीन के लिए एक व्यापार गलियारा बन सकता है.

इससे पहले भारत के पूर्वोत्तर में निवेश बढ़ाने पर जापान के जोर देने के बीच चीन ने शुक्रवार (15 सितंबर) को कहा था कि वह चीन-भारत सीमा विवादों के समाधान में किसी तीसरे पक्ष की भागीदारी के खिलाफ है और उन क्षेत्रों में किसी भी विदेशी निवेश का भी विरोध करता है जिन पर उसका दावा है. चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे की भारत यात्रा के दौरान पूर्वोत्तर राज्यों में निवेश की जापान की योजना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि चीन उन क्षेत्रों में किसी भी विदेशी निवेश का विरोध करता है जिनमें उसका भारत के साथ विवाद है.

प्रवक्ता ने कहा, ‘‘आपने एक्ट ईस्ट नीति का भी जिक्र किया है. आपको यह स्पष्ट होना चाहिए कि भारत और चीन सीमा क्षेत्र की सीमारेखा पूरी तरह निर्धारित नहीं है. हमारे बीच सीमा के पूर्वी खंड पर मतभेद है.’’ हालांकि उन्होंने अरुणाचल प्रदेश का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया जिसे वह दक्षिण तिब्बत का हिस्सा होने का दावा करता है.

हुआ ने कहा था, ‘‘हम बातचीत के जरिए ऐसे समाधान की तलाश कर रहे हैं जो दोनों पक्षों को मंजूर हो. ऐसी परिस्थितियों में विभिन्न पक्षों को इन पहलुओं का सम्मान करना चाहिए और विवादों को हल करने के हमारे प्रयासों में किसी तीसरे पक्ष को शामिल नहीं किया जाना चाहिए.’’ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री आबे के बीच बातचीत के बाद जारी संयुक्त भारत-नेपाल वक्तव्य के बारे में एक सवाल पर जवाब देते हुए सीमा विवाद का भी जिक्र किया. हालांकि दस्तावेज में अरुणाचल प्रदेश में निवेश का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है.

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