तुर्की ने माना- F-16 के खिलाफ S-400 का किया टेस्ट, बोला- हमें इजाजत की जरूरत नहीं

तुर्की ने माना- F-16 के खिलाफ S-400 का किया टेस्ट, बोला- हमें इजाजत की जरूरत नहीं
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अंकारा
तुर्की ने आखिरकार खुलेआम स्वीकार कर लिया है कि उसने अमेरिका के के खिलाफ रूस की को टेस्ट किया है। तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैय्यप एर्दोगन ने शुक्रवार को इस टेस्ट की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि उनके देश ने अमेरिका की आपत्तियों के बावजूद रूस-निर्मित एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली का परीक्षण कर लिया है।

हमें अमेरिका से पूछने की जरूरत नहीं
एर्गोगन ने अमेरिका पर गुस्सा जताते हुए कहा कि तुर्की को अपने उपकरणों का परीक्षण करने का अधिकार है। अमेरिका का रुख हमारे लिये किसी भी प्रकार से बाध्यकारी नहीं है। हमें अमेरिका से पूछने की जरूरत नहीं है। एर्दोगन ने अमेरिका पर प्रतिबंधों को लेकर दोहरा मानदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नाटो का सदस्य ग्रीस भी तो एस-300 मिसाइल रक्षा प्रणाली का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने पूछा, ”क्या अमेरिका ने उसे कुछ कहा?’

एस-400 के रडार से एफ-16 विमानों की टोह ले रहा तुर्की
कुछ दिन पहले ही ऐसी रिपोर्ट्स आई थी कि तुर्की की सेना ने रूस के एस-400 डिफेंस सिस्टम को एक्टिवेट कर दिया है। टर्किश फोर्स इस रूसी डिफेंस सिस्टम के रडार का उपयोग एफ-16 फाइटर जेट का पता लगाने के लिए कर रही है। इस रडार के जरिए वह नाटो के यूनुमिया मिलिट्री एक्सरसाइड में शामिल फ्रांस, इटली, ग्रीस और साइप्रस के एफ-16 जहाजों को ट्रैक करने की कोशिश कर रहा है।

तुर्की के पास भी अमेरिकी एफ-16
बता दें कि तुर्की के पास भी अमेरिका से खरीदा हुआ एफ-16 फाइटर जेट है। जिसमें तुर्की ने अपनी जरूरत के हिसाब से कुछ बदलाव कर इसे एफ-16एस का नाम दिया है। इन दिनों तुर्की और अमेरिका के संबंध ठीक नहीं चल रहे। बस इसी बात का बदला लेने के लिए वह रूसी हथियारों का प्रयोग अमेरिकी हथियारों के खिलाफ कर रहा है। अमेरिका ने पहले भी तुर्की पर कई प्रतिबंध लगाए हैं, जिसके कारण उसकी अर्थव्यवस्था बर्बादी के कगार पर खड़ी है।

एफ-35 कार्यक्रम से अमेरिका ने तुर्की को किया था बाहर
अमेरिका ने नाटो के सदस्य तुर्की द्वारा रूस की विमान-रोधी प्रणाली खरीदने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए अपने एफ-35 लड़ाकू विमान कार्यक्रम से तुर्की को बाहर कर दिया था। अमेरिका ने कहा था कि एस-400 प्रणाली स्टील्थ लड़ाकू विमानों के लिये खतरा है और इसका नाटो की प्रणाली के साथ इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। अमेरिका ने इसके लिये तुर्की पर प्रतिबंध लगाने की भी चेतावनी दी थी। तुर्की ने कहा था कि उसने अमेरिका के यूएस पैट्रियोट प्रणाली बेचने से इनकार करने के बाद रूस से एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदी थी। तुर्की ने यह भी कहा था कि वह चाहे जो प्रणाली खरीद सकता है, यह उसका संप्रभु अधिकार है।

तुर्की ने तैनात की रूसी एस-400 डिफेंस सिस्टम
तुर्की ने इससे पहले कहा था कि एस-400 प्रणाली का संचालन अप्रैल में शुरू होगा, लेकिन प्रणाली को सक्रिय करने में देरी हुई है। पिछले हफ्ते तुर्की की मीडिया में आईं खबरों में कहा गया था कि सेना ने काला सागर के नजदीक स्थित सिनोप प्रांत में रूस की एस-400 वायु रक्षा प्रणाली का परीक्षण किया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और तुर्की के बीच तनाव और बढ़ सकता है।

क्यों डरा हुआ है अमेरिका
अमेरिका में हथियारों का बाजार खबरों डॉलर का है। कहा यह भी जाता है कि अमेरिकी हथियार लॉबी इतनी सक्रिय है कि वह चाहे तो राष्ट्रपति तक को पह भर में बदल सकती है। ऐसे में अगर यह साबित हो जाता है कि रूसी हथियार अमेरिका की तुलना में एडवांस हैं तो इससे इस लॉबी को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। दुनिया के सबसे अधिक देशों पास अमेरिका का एफ-16 फाइटर प्लेन है। ऐसे में अमेरिका नहीं चाहेगा कि उसे रूस के हाथों हार का सामना करना पड़े।

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