बसपा सरकार की नाकामियों पर योगी सरकार ने जारी किया श्वेतपत्र

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लखनऊ : उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अपने गठन के छह माह पूरे होने की पूर्व संध्या पर सोमवार को प्रदेश की पिछली सपा-बसपा सरकारों की नाकामियों पर श्वेतपत्र जारी किया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप-मुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्य, डाक्टर दिनेश शर्मा तथा उनके अनेक मंत्रिमंडलीय सहयोगियों ने संयुक्त रूप से यह श्वेतपत्र जारी किया.

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 19 मार्च को उनके नेतृत्व में सरकार बनने से पहले प्रदेश की क्या स्थिति थी, यह समाज के सामने रखना अत्यंत आवश्यक था. हमें छह माह पूर्व प्रदेश किस हालत में मिला, हमने इसका श्वेतपत्र जारी किया है. जनता को यह जानने का हक है, इसलिए यह श्वेतपत्र प्रकाशित किया गया है.

योगी ने कहा कि हालांकि, पिछले 12-15 वर्षों के अंदर प्रदेश की सरकारों के कारनामों की अनंत शृंखला रही है, लेकिन हमने कुछ मुख्य बिंदुओं पर ही ध्यान केंद्रित करके उन्हें श्वेतपत्र के जरिये सामने रखा है. चुनाव जीतने के बाद जनता के प्रति पार्टियों की जवाबदेही किस प्रकार बदलती है, यह श्वेतपत्र उसकी गवाही देता है. उन्होंने कहा कि सरकार की अपने गठन के शुरुआती छह माह की उपलब्धियों को सामने रखने से पहले यह श्वेतपत्र जारी किया है.

योगी ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) तथा ऋणग्रस्तता के बिंदुओं का जिक्र करते हुए कहा कि नियंत्रक एवं लेखा महापरीक्षक के प्रतिवेदन के अनुसार 30 सितंबर 2016 तक उत्तर प्रदेश में कार्यरत प्रदेश के सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) के अद्यतन लेखों के अनुसार कुल 17 हजार 789.91 करोड़ रुपये की हानि उठायी, वहीं वर्ष 2011-12 में यह 6489.58 ही थी.

उन्होंने बताया कि इसके अलावा वर्ष 2011-12 में पीएसयू पर 35 हजार 952.78 करोड़ रुपये का कर्ज था जो 2015-16 में बढ़ कर 75 हजार 950. 27 करोड़ रुपये हो गया. मुख्यमंत्री ने बताया कि 31 मार्च 2007 को प्रदेश सरकार पर 1,34,915 करोड़ रुपये का कर्ज था जो 31 मार्च 2017 को बढ़ कर 3,74,775 करोड रुपये हो गया. इस प्रकार पिछले 10 वर्षों में प्रदेश की ऋणग्रस्तता ढाई गुना बढ़ गयी.

सरकार ने 24 पन्नों के इस श्वेत पत्र में वर्ष 2003 से मार्च 2017 के बीच रही सपा-बसपा सरकारों के कार्यकाल के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में आयी गिरावटों का जिक्र किया है. इनमें कानून व्यवस्था, कृषि, लोक निर्माण, चीनी मिल, खाद्य एवं रसद, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा संचालित परीक्षाएं, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, शिक्षा, बिजली, खनन, पर्यटन एवं संस्कृति, आवास एवं शहरी नियोजन, आबकारी, स्मारकों के निर्माण, प्रदेश की वित्तीय स्थिति समेत 25 बिंदु शामिल हैं.

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