छोटे बच्चों के स्कूल खोले जाने चाहिए या नहीं? जानिए एक्सपर्ट्स ने क्या बताया

छोटे बच्चों के स्कूल खोले जाने चाहिए या नहीं? जानिए एक्सपर्ट्स ने क्या बताया
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नई दिल्ली
सीरो सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर आईसीएमआर ने छोटे बच्चों के स्कूल खोले जाने की बात कही है। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि दो-तीन महीने और इंतजार करना चाहिए, क्योंकि रिपोर्ट में छोटे बच्चे-बड़े बच्चों और अडल्ट में एंटीबॉडी पाए जाने का अंतर सिर्फ 5 से 10 पर्सेंट ही है। 6 से 9 साल के 57.2 पर्सेंट बच्चों में ही एंटीबॉडी मिली है, यानी जिन 40 करोड़ लोगों को अभी भी संक्रमण का खतरा है, उसमें आधे बच्चे हैं, इसलिए थर्ड वेव का इंतजार करें, उसके बाद ही इस तरह की योजना पर अमल करें। डॉक्टरों ने कहा कि स्कूल खाले जाने की योजना अलग-अलग राज्य और वहां की परिस्थितियों के अनुसार होनी चाहिए।

‘जहां स्कूल खोले गए, वहां कोरोना के मामले बढ़े’
दिल्ली मेडिकल काउंसिल के प्रेसिडेंट व पीडिएट्रिक्स डॉक्टर अरुण गुप्ता ने कहा कि जिन देशों में बच्चों का स्कूल खोला गया है, वहां पर कोरोना के मामले बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि मेरी राय है कि अभी स्कूलों को नहीं खोलना चाहिए। डॉक्टर गुप्ता ने कहा कि जो एंटीबॉडी बच्चों में मिली है, क्या उससे यह साबित हो रहा है कि वह उससे संक्रमित नहीं होंगे। अगर वो संक्रमित होते हैं तो वह सुपर स्प्रेडर बन सकते हैं। बच्चों से उनके परिवार को खतरा है।

सर्वे में छोटे बच्चे में 57 पर्सेंट एंटीबॉडी मिली
मेदांता की पीडिएट्रिक्स डॉक्टर नीलम मोहन ने कहा कि पिछले सर्वे की तुलना में इस सर्वे में बच्चों में एंटीबॉडी का स्तर काफी बढ़ा है। यानी बच्चे भी संक्रमित हुए हैं और यह उस स्तर तक पहुंच चुका है, जितना अडल्ट का है। 6 से 9 साल के बीच के बच्चों में 57.2 पर्सेंट एंटीबॉडी मिली है, जबकि 10 से 17 वालों में यह 61.6 पर्सेंट है। जबकि ओवरऑल 67.6 पर्सेंट है। इससे पता चल रहा है कि बच्चे संक्रमित हो रहे हैं। 9 साल से कम उम्र के बच्चे और बड़ों में सिर्फ 10 फीसदी का अंतर बचा है। डॉक्टर नीलम ने कहा कि इस सर्वे के आधार पर आईसीएमआर ने कहा कि 40 करोड़ लोग अभी भी खतरे में हैं, जिन्हें संक्रमण हो सकता है। इस 40 करोड़ में तो बच्चे भी हैं। सर्वे में छोटे बच्चे में 57 पर्सेंट एंटीबॉडी मिली है, यानी 43 पर्सेंट बच्चे अभी भी खतरे के दायरे में हैं।

स्कूल खोलने में न करें जल्दबाजी
उन्होंने कहा कि मेरी राय है कि अभी जल्दीबाजी न करें। वैक्सीनेशन प्रोग्राम को और तेज करें। स्कूल खोलने की योजना राज्य अपने अपने अनुसार करें। हालांकि, डॉक्टर नीलम का यह भी कहा कि हमें स्कूल खोलने के बारे में सोचना जरूर चाहिए, लेकिन इसके लिए फुल प्रूव प्लान बनाना चाहिए। रेनबो हॉस्पिटल के डॉक्टर चंद्रशेखर ने कहा कि यह सच है कि बच्चों में खतरा कम है। इसकी वजह यह है कि जो हेल्दी बच्चे होते हैं, उनकी इम्यूनिटी बहुत स्ट्रांग होती है। उनमें संक्रमण के बाद भी गंभीरता कम होती है। अभी कुछ और महीने इंतजार करना चाहिए और वैक्सीनेशन को तेज करें।

फोटो और समाचार साभार : नवभारत टाइम्स

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