लेडी डॉक्टर की हत्या के आरोपी की जमानत खारिज, SC ने कहा- आरोप की गंभीरता देखना जरूरी

लेडी डॉक्टर की हत्या के आरोपी की जमानत खारिज, SC ने कहा- आरोप की गंभीरता देखना जरूरी
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नई दिल्ली
एक लेडी डॉक्टर की हत्या मामले के आरोपी को मिली जमानत सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोप की गंभीरता को देखना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट के उस फैसले को खारिज कर दिया जिसमें हाई कोर्ट ने आरोपी को जमानत दी थी। आरोपी पर लेडी डॉक्टर की हत्या का चार्ज है। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस इंदिरा बनर्जी की अगुवाई वाली बेंच ने इस दौरान टिप्पणी करते हए कहा कि जब जमानत अर्जी पर विचार किया जाए तब आरोप की गंभीरता भी एक अहम तथ्य है जिसे देखा जाना चाहिए।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक 28 सितंबर 2020 को आरोपी महेश ने दोपहर साढ़े तीन बजे 30 साल की लेडी डॉक्टर की चाकू मारकर हत्या कर दी। ये घटना डेंटल क्लिनिक के अंदर हुई थी। डॉक्टर डेंटल क्लिनिक चलाती थी। उसके पेट में चाकू मारी गई थी। उस वक्त डॉक्टर के पिता भी वहां मौजूद थे। इस मामले में आरोपी ने जमानत की अर्जी सेशन कोर्ट में दाखिल की थी लेकिन सेशन कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी थी लेकिन केरल हाई कोर्ट से आरोपी को जमानत मिल गई थी। इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा-439 के तहत जब जमानत अर्जी पर विचार किया जाता है तो आरोप की गंभीरता को देखना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा केस में केरल हाई कोर्ट ऑर्डर दोषपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोप गंभीर है। आरोपी 6 अक्टूबर से कस्टडी में है। हाई कोर्ट ने केस के फैक्ट पर विचार नहीं किया जबकि आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप हैं। अभी मामले में चार्जशीट तक दाखिल नहीं की गई है। हाई कोर्ट ने मामले में आरोप की गंभीरता और सजा की गंभीरता के बारे में विवेक का इस्तेमाल नहीं किया। यहां तक कि घटना के बाद आरोपी फरार था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारा मत है कि हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कोविड मामले में दिए गए निर्देश का गलत मतलब निकाला। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहीं भी नहीं कहा था कि मर्डर केस के आरोपी को रिलीज किया जाए। आरोपी के खिलाफ चश्मदीद गवाह है और वह मर्डर केस का आरोपी है। अभी चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है। घटना के बाद वह फरार था। ऐसे में केरल हाई कोर्ट के उस आदेश को खारिज किया जाता है जिसमें आरोपी को बेल दिया गया था। आरोपी को कस्टडी में लिया जाए।

साभार : नवभारत टाइम्स

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