संजय सिंह के वकील ने दी दलील तो SC ने कहा- कोई समाज को जाति और धर्म के नाम पर बांट नहीं सकता

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नई दिल्ली
आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह के खिलाफ यूपी में दर्ज केस में दंडात्मक कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। राज्य सभा एमपी संजय सिंह के खिलाफ यूपी पुलिस ने नफरत वाले बयान देने का मामला दर्ज किया था। इसी मामले में संजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर राहत की गुहार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने संजय सिंह की अर्जी पर सुनवाई के दौरान यूपी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है।

वकील की दलील पर सुप्रीम कोर्ट नाराजसुप्रीम कोर्ट में संजय सिंह की ओर से अर्जी दाखिल कर कहा गया है कि उनके खिलाफ दर्ज केस खारिज किया जाए। साथ ही कहा गया है कि तमाम केसों को क्लब किया जाए। सुप्रीम कोर्ट से सिंह के वकील विवेक तन्खा ने कहा कि पुलिस ने किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। राज्यसभा एमपी के खिलाफ केस दर्ज करने से पहले सेंक्शन नहीं लिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई समाज को जाति और धर्म के नाम पर बांट नहीं सकता। हम अभी सेंक्शन के मुद्दे में नहीं जा रहे हैं लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि मामला नहीं बनता।

सुप्रीम कोर्ट ने दी राहतआम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह के खिलाफ यूपी में दर्ज केस में उनके खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट से प्रोटेक्शन देने से सुप्रीम कोर्ट ने 2 फरवरी को इनकार कर दिया था। लखनऊ में दर्ज केस में संजय सिंह के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था। पिछले साल 22 अगस्त को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजय सिंह ने यूपी सरकार पर आरोप लगाया था कि वह समाज के एक विशेष वर्ग को फेवर कर रही है। इसके बाद लखनऊ में उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया था।

हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थीआप नेता संजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर इस मामले में यूपी के अलग-अलग जिलों में दर्ज केस को खारिज करने की गुहार लगाई है। याचिका में कहा गया है कि राजनीतिक उद्देश्य से उनके खिलाफ दुर्भावना वश केस दर्ज किया गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 21 जनवरी को दिए आदेश में केस रद्द करने से मना कर दिया था जिसके बाद हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अशोक भूषण की अगुवाई वाली बेंच ने कहा था कि वह हाई कोर्ट के आदेश को देखे बिना आदेश पारित नहीं करेगी।

साभार : नवभारत टाइम्स

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