कॉलोनी बन रहा गिलगित-बाल्टिस्तान, चीन-पाकिस्तान के BRI को अवैध घोषित करे संयुक्त राष्ट्र: पॉलिटिकल ऐक्टिविस्ट

कॉलोनी बन रहा गिलगित-बाल्टिस्तान, चीन-पाकिस्तान के BRI को अवैध घोषित करे संयुक्त राष्ट्र: पॉलिटिकल ऐक्टिविस्ट
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जेनेवा
एक ओर जहां पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को घेरने की कोशिश करता है, उसकी पोल हर बार खुल जाती है। इस बार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के ऐक्टिविस्ट ने संयुक्त राष्ट्र ने चीन और पाकिस्तान के बीच हुए बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव (BRI) को ही अवैध घोषित करने की मांग की है। चीन के ऊपर आरोप लगता रहा है कि वह के जरिये छोटे देशों को कर्ज के जाल में फंसा रहा है। वहीं, पाकिस्तान ने हाल ही में ऐलान किया है कि गिलगित-बाल्टिस्तान को प्रांत बनाया जाएगा।

‘BRI को अवैध घोषित करे UN’
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के पॉलिटिकल ऐक्टिविस्ट डॉ. अमजद मिर्जा ने जेनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा है कि पाकिस्तान और चीन के बीच बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव प्रॉजेक्ट को संयुक्त राष्ट्र को अवैध घोषित कर देना चाहिए। मिर्जा ने कहा, ‘आज हम गिलगित-बाल्टिस्तान में दोहरे उपनिवेशवाद का सामना कर रहे हैं क्योंकि चीन पाकिस्तान के साथ आ गया है।’

चीन पर कर्ज का जाल फैलाने का आरोप
चीन के अतिमहत्वाकांक्षी BRI प्रॉजेक्ट के तहत चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा () आता है। इसके तहत चीन ने पाकिस्तान में इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए अरबों की डील की है। वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीन इसकी मदद से धीरे-धीरे पाकिस्तान की राजनीति पर नियंत्रण हासिल करना चाहता है। शी जिनपिंग की सरकार ने दबाव डाला है कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को लागू करने और मॉनिटर करने में योजना मंत्रालय की भूमिका को खत्म किया जाए।

POK पर कब्जा करने की फिराक में पाकिस्तान
दूसरी ओर, पाकिस्तान ने ऐलान किया है कि वह गिलगित-बाल्टिस्तान को प्रांत का दर्जा देना चाहता है। साथ ही यह भी ऐलान किया गया है कि नवंबर में यहां चुनाव कराए जाएंगे। भारत ने इसका पहले से विरोध किया है। भारत ने साफ किया है कि गिलगित-बाल्टिस्तान समेत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा हिस्सा भारत का है और पाकिस्तान को यहां चुनाव कराने का अधिकार नहीं है।

भारत के खिलाफ चीन को फायदा पहुंचाने की कोशिश
खास बात यह है कि गिलगित-बाल्टिस्तान को प्रांत घोषित करने के साथ इस क्षेत्र में चीन के साथ CPEC के तहत निर्माण का रास्ता भी खुल जाएगा। इससे चीन को भारत की एक और सीमा के ज्यादा करीब आने का मौका मिल जाएगा। यही नहीं, चीन और भारत के बीच दूसरी सीमाओं पर टकराव की स्थिति में पाकिस्तान इस इलाके को भी भारत के खिलाफ ऐक्शन के लिए इस्तेमाल कर सकेगा।

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