'सीक्रेट हथियार' से घुसपैठ कर रहा है चीन

'सीक्रेट हथियार' से घुसपैठ कर रहा है चीन
Facebooktwitterredditpinterestlinkedinmail

कैनबेरा
कोरोना वायरस को लेकर चीन पहले ही पूरी दुनिया के निशाने पर है, ऑस्ट्रेलिया के साथ उसके संबंध और तल्ख होते जा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के एक थिंक-टैंक ने दावा किया है कि चीन दुनिया पर असर डालने के लिए ‘खास’ तरीके अपना रहा है। ऑस्ट्रेलिया स्ट्रटीजिक पॉलिसी इंस्टिट्यूट (ASPI) की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी (CCP) ने कूटनीति और प्रॉपगैंडा के अलावा दूसरे तरीकों को अपनाना शुरू कर दिया है। अनैलिस्ट ऐलेक्स जॉस्की की रिपोर्ट ‘The party speaks for you: foreign interference and the Chinese Communist Party’s united front system’ का चीन ने खंडन किया है।

खास यूनिट दे रही है काम को अंजाम
जॉस्की ने दावा किया है कि चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी ने हाल ही में दुनिया के राजनीतिक सिस्टम्स में घुसपैठ करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा है कि पार्टी ने सफलता से विदेशी नेताओं, यूनिवर्सिटीज, मल्टीनैशनल कंपनियों और बाहर रह रहे चीनी समुदाय को अपने हित में प्रभावित किया है। जॉस्की का कहना है कि CCP का यूनाइटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट (UFWD) यह काम कर रहा है। उन्होंने कहा है कि CCP की इन देशों के समुदायों में दखल देने, राजनीतिक सिस्टम पर असर डालने, अहम और संवेदनशील टेक्नॉलजी को छिपकर हासिल करने की कोशिश से चीन और दूसरे देशों में तनाव बढ़ेगा।

जिनपिंग का सीक्रेट हथियार
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने UFWD को चीन का ‘सीक्रेट हथियार’ बताया था। जॉस्की उन्हीं की बात को दोहराते हुए कहते हैं कि संगठनों के गठबंधन की मदद से सामाजिक एकता को खत्म करने और नस्लीय तनाव को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा है कि UFWD यह भी चाहता है कि CCP के लिए इंटेलिजेंस जानकारी जुटाई जाए और टेक्नॉलजी की चोरी की जाए। जॉस्की का कहना है कि Confucius Institutes (चीनी शिक्षण संस्थान) पेइचिंग की प्रॉपगैंडा मशीन का हिस्सा है और उसके हिसाब से ही काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया है कि चीनी स्टूडेंट्स और प्रफेसर ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों में अकैडिमक फ्रीडम को दबाने की कोशिश कर चुके हैं।

ये काम करने का जिम्मा UFWD को
जॉस्की ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है- ‘आज दूसरे देशों में UFWD CCP के राजनीतिक प्रभाव को बढ़ाने, चीन के खिलाफ चल रहे आंदोलनों को दबाने, ताईवान को हासिल करने कि लिए अनुकूल अंतरराष्ट्रीय माहौल बनाने, इंटेलिजेंस जुटाने, चीन में निवेश को बढ़ावा देने और टेक्नॉलजी के ट्रांसफर के लिए काम कर रहा है।’ इसके लिए बड़ी मात्रा में समुदायों, बिजनस और स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन्स को फंड किया जाता है जो चीन के साथ अपने संबंध जाहिर नहीं करते हैं। उन्होंने बताया है कि ऑस्ट्रेलियन नैशनल यूनिवर्सिटी और पार्लमेंट में डिजिटल हमले से चीन के तार जुड़े थे।

चीनी संबंध हो न दिया जाए वीजा
जॉस्की ने ऑस्ट्रेलिया की सरकार से CCP से संबंध वाली मीडिया एजेंसियों और कॉर्पोरेशन्स को वीजा न देने की अपील की है। जॉस्की का कहना है कि कोरोना वायरस महामारी के दौरान UFWD ने ऑस्ट्रेलिया के संगठनों की मदद से मेडिकल सप्लाई चीन भेजने की कोशिश की। पिछले महीने ऑस्ट्रेलिया की बॉर्डर फोर्स को मास्क और दूसरे पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट का बड़ा शिपमेंट मिला था। उन्होंने शक जताया है कि लोकतांत्रिक देशों के बीच में पेइचिंग के बढ़ते प्रभाव को खत्म करने के लिए सहयोग जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा है कि अंतरराष्ट्रीय सरकारें पेइचिंग के प्रॉपगैंडा को जानते हुए भी CCP के खुले तौर पर चालू अजेंडा को पहचान नहीं सकी हैं।

कोरोना वायरस को लेकर तल्ख हुए संबंध
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने इस बारे में कहा है कि उन्हें रिसर्च के आधार के बारे में तो नहीं पता लेकिन उन्हें ये पता है कि ऑस्ट्रेलिया में लोग आर्टिकल लिख रहे हैं और इस संस्थान (ASPI) को अमेरिकी सरकार और आर्म डीलर्स से वित्तीय सहायता मिलती है। इसलिए वह चीन के विरोध में मुद्दों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया के कोरोना वायरस की जांच की मांग करने के बाद चीन ने ऑस्ट्रेलिया के बीफ का निर्यात बंद कर दिया और जौं पर टैरिफ लगा दिया। यहां तक कि स्टूडेंट्स और टूरिस्ट्स को सलाह दी गई है कि वे ऑस्ट्रेलिया न जाएं। इस पर ऑस्ट्रेलिया के पीएम स्कॉट मॉरिसन ने कहा है कि वह चीन से डरने वाले नहीं हैं।

Facebooktwitterredditpinterestlinkedinmail

WatchNews 24x7

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *