कृषि कानून वापस लेते ही बिखरा किसान आंदोलन, चढूनी ने पॉलिटिकल पार्टी बनाई, क्या करेंगे राकेश टिकैत?

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अब नई दिल्ली
गुरु पर्व के दिन सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित किया। किसी भी शख्स के ख्याल में नहीं आया कि पीएम मोदी तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने का ऐलान कर देंगे मगर हमेशा की तरह पीएम मोदी ने फुल टॉस गेंद पर सिक्स लगाकर सबको चौंका दिया। पीएम मोदी के एक ही तीर से कई निशाने साध दिए। उधर किसानों से माफी मांग कर उनका गुस्सा शांत किया, इधर विपक्ष के पास बचा एक मुद्दा वो भी छीन लिया। कुछ दिनों बाद ही संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन वापस लिया और इसके साथ ही एक नई कहानी की शुरुआत होती है।

क्या करेंगे राकेश टिकैत?अब सवाल ये उठता है कि क्या इस किसान आंदोलन में सबसे बड़ा चेहरा बने राकेश टिकैत क्या करेंगे। अगले साल यानी कुछ ही दिनों बाद देश के पांच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। उत्तर प्रदेश में भी अगले ही साल चुनाव होने वाले हैं। राकेश टिकैत उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हैं और उनका राजनीतिक करियर भी रहा है। किसान आंदोलन का दूसरा बड़ा चेहरा गुरनाम सिंह चढूनी ने अपनी राजनीतिक पार्टी का ऐलान कर दिया है। वो पंजाब विधानसभा चुनाव में अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।

राजनीतिक पार्टियां डाल रहीं डोरेइधर राकेश टिकैत को कई पार्टियां डोरे डाल रही हैं। राकेश टिकैत ने तो साफ कर दिया है कि वो चुनाव नहीं लड़ेंगे मगर पार्टियां उनको चुनाव लड़ने का आग्रह कर रही हैं। ये बात तो सही है कि किसान आंदोलन ने राकेश टिकैत को बड़ा किसान नेता बना दिया। ये बात भी सही है कि पीएम मोदी के कृषि कानून वापसी के बाद उनका कद और बढ़ गया। और उसी बढ़े कद के कारण समाजपार्टी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा था कि अगर टिकैत साहब चुनाव लड़ना चाहते हैं तो उनका स्वागत है।

किसान आंदोलन रहा राजनीति से दूरकिसान आंदोलन के दौरान किसान मोर्चा ने कुछ शर्ते रखीं थी, जिसमें से सबसे ज्यादा अहम शर्त थी एमएसपी पर कानून। सरकार ने इसके लिए एक कमेटी गठित की। उस कमेटी में किसान मोर्चा के पांच लोगों का नाम भी शामिल किया गया। कमेटी उस पर अपनी रिपोर्ट आगे सौंपेगी लेकिन इस सब के बीच किसान आंदोलन बिखरता जा रहा है। पहले पंजाब के कुछ संगठनों ने बेरुखी दिखाई थी। 378 दिनों तक चले आंदोलन को राकेश टिकैत ने राजनीति से दूर रखा। मगर जब आंदोलन खत्म हुआ तो आंदोलन में शामिल नेताओं ने अपना अलग रास्ता अख्तियार कर लिया।

किसानों के बड़े लीडर थे राकेश टिकैत के पिताराकेश टिकैत के पिता महेंद्र सिंह टिकैत किसानों के बड़े लीडर थे। सत्ताधारी उनसे खौफ खाते थे। महेंद्र सिंह टिकैत हमेशा सियासत से दूर रहे, वह किसानों के बीच ही रहे और भारतीय किसान यूनियन को गैर-राजनीतिक संगठन के रूप में स्थापित किया। लेकिन राकेश टिकैत की महत्वाकांक्षा कुछ और दिखी। राकेश टिकैत लगातार भारतीय किसान यूनियन के जरिए राजनीति में प्रवेश का ताना-बाना लगातार बुनने की कोशिश में रहे।

राकेश टिकैत का राजनीतिक सफर इसी कोशिश में उन्होंने 2007 में मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा। लेकिन यहां उनकी बुरी हार हुई। यही नहीं महेंद्र सिंह टिकैत के कद के चलते राकेश की ये हार पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गई। वैसे राकेश टिकैत ने इसके बाद भी हार नहीं मानी और 2014 में आखिरकार उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल का दामन थाम लिया और अमरोहा से लोकसभा चुनाव मैदान में उतरे। लेकिन यहां भी नतीजे में उन्हें हार ही मिली।

चढ़ूनी ने बनाई पार्टीभारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने संयुक्त संघर्ष पार्टी नाम से राजनीतिक दल बनाया है। उनकी पार्टी आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव में 117 सीटों पर लड़ती नजर आएगी। चढ़ूनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नई पार्टी की जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने कहा कि राजनीति दूषित हो चुकी है, इसलिए इसमें बदलाव की जरूरत है। इसी के साथ चढ़ूनी सक्रिय राजनीति में आने वाले पहले किसान नेता बन गए हैं जो कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन अगुआई कर रहे थे।

किसान आंदोलन का प्रमुख चेहरासंयुक्त कृषि कानूनों के खिलाफ सबसे पहले आंदोलन छेड़ने वाले किसान रहे हैं। वह बीकेयू की हरियाणा यूनिट के प्रमुख हैं। चंडीगढ़ में 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चढ़ूनी ने कहा, भारतीय राजनीति दूषित हो चुकी है। इसमें बदलाव की जरूरत है। पॉलिसीमेकर पूंजीवाद को बढ़ावा देने वाले नीति निर्माताओं, पूंजीपतियों के पक्ष में नीतियां बना रहे हैं। आम आदमी, गरीबों के लिए कुछ नहीं किया गया। इसलिए हम नई पार्टी- संयुक्त संघर्ष पार्टी- लॉन्च कर रहे हैं।

अखिलेश यादव ने दिया प्रपोजलसमाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पहले राकेश टिकैत को विधानसभा चुनाव लड़ने का न्यौता दिया था। शामली में टिकैत ने शनिवार को मीडिया से बातचीत के दौरान चुनाव लड़ने के सवाल पर इस प्रकार की किसी भी संभावना से साफ मना कर दिया। साथ ही, उन्होंने कहा कि किसान की समस्याओं को लगातार उठाते रहेंगे। सरकार अगर वादे से मुकरेगी तो किसान आंदोलन का रास्ता फिर अपनाएगा। उनका चुनाव से कोई मतलब नहीं हैं। वह सभी दलों के चाहते है कि वे अपने घोषणापत्र में किसानों के लिए क्या करेंगे उसका उल्लेख प्रमुखता से कर दें।

राकेश टिकैत के सामने अब क्या विकल्पअब साफ दिख रहा है कि जैसे अन्ना आंदोलन के बाद आप का जन्म हुआ उसी तरह इस किसान आंदोलन से भी किसी न किसी राजनीतिक दल का उदय होगा। अन्ना आंदोलन में मुख्य रहे अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने इसी तरह अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई और दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुए। किसान आंदोलन के एक चेहरे ने अपना रास्ता बता दिया। गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने अपनी राजनीतिक पार्टी का गठन किया और चुनाव लड़ने का ऐलान भी कर दिया। अब किसान आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा राकेश टिकैत के सामने बड़ा सवाल है कि अब वो आगे क्या करेंगे।

फोटो और समाचार साभार : नवभारत टाइम्स

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