Opinion : विरोधियों को सबक सिखाने के लिए बंद करें FIR का गलत इस्तेमाल

Opinion : विरोधियों को सबक सिखाने के लिए बंद करें FIR का गलत इस्तेमाल
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नई दिल्ली भारत में केंद्र और राज्य सरकारें लंबे समय से कई नियमों का दुरुपयोग करती रही हैं। भारत में सरकार विपक्षी दलों और आलोचकों को परेशान करने के लिए नियमों का दुरुपयोग करती हैं। ट्रोलिंग, गालियां देना और सोशल मीडिया पर रेप या मारने की धमकी देना अब आम चलन हो गया है। इन दिनों भारतीय जनता पार्टी सत्ता में है और इसलिए इस तरह के टैक्टिक का इस्तेमाल वही कर रही है लेकिन सभी पार्टियां इस तरह के फंडे का इस्तेमाल कर अपने विरोधियों को सबक सिखाती हैं।

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आम लोग कर रहे टार्गेट
भारत में विरोध की आवाज दबाने के लिए परंपरागत माध्यम की जगह अब एक नई चीज आ गई है। सिविल राइट्स एक्टिविस्ट राना अय्यूब ने कहा है कि अब उन्हें न सिर्फ बीजेपी सरकार बल्कि आम लोग और संस्थाएं भी टारगेट कर रही हैं। उनके खिलाफ फर्स्ट इनफॉरमेशन रिपोर्ट (FIR) दायर की जा रही है। राना अय्यूब का अधिकतर समय कानूनी मसलों से निपटने में जुट जाता है जिससे वे अपने कामकाज पर ध्यान नहीं दे पा रही हैं।

तंग करने का माध्यम
राना अय्यूब का मामला कोई इकलौता मामला नहीं है। हाल में ही फिल्म मेकर गौतम सुब्रमण्यम ने कहा कि कोई भी पुलिस स्टेशन जाकर किसी के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करा सकता है। वास्तव में FIR कराने की यह सुविधा वंचित तबके के लोगों को न्याय दिलाने के हिसाब से की गई थी, लेकिन अब यह दूसरों को तंग करने का एक हथियार बन गई है।

बिना वारंट गिरफ्तारी
अगर FIR में कॉग्निजेबल ऑफेंस का जिक्र हो तो इसमें बिना वारंट के भी गिरफ्तारी की जा सकती है। कॉग्निजेबल ऑफेंस में दुश्मनी करना और धार्मिक भावनाओं को भड़काना आदि शामिल है। अगर सत्तारूढ़ पार्टी की बात की जाए तो इसका इस्तेमाल कर वे अपने विरोधियों की आवाज दबाते हैं।

अलग विचार का हो सम्मान
लोगों के विचार अलग-अलग हो सकते हैं। यह हिंदू या मुस्लिम धर्म से अलग बातें हैं। एक धर्म में भी दो लोगों के दो विचारों सकते हैं जबकि अलग-अलग दो धर्मों के लोगों के विचार भी मिल सकते हैं। हर धर्म और जाति अपने आप को एक दूसरे से ऊंचा मानती है और दूसरे को नीचा दिखाना चाहती है। इसका मतलब यह नहीं है कि किसी एक धर्म को मानने वाला व्यक्ति दूसरे की भावनाओं को आहत करे। इसका मतलब यह है कि आपको सबका सम्मान करना चाहिए और सबकी भावनाओं का ख्याल रखना चाहिए। खासतौर पर सत्तारूढ़ दल को विरोध की आवाज दबाने के लिए क़ानूनी विकल्पों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

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फोटो और समाचार साभार : नवभारत टाइम्स

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