राम मंदिर को लेकर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कर डाली ये मांग – Watchnews24x7.com

राम मंदिर को लेकर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कर डाली ये मांग

राम मंदिर को लेकर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कर डाली ये मांग
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भोपाल. भले ही अयोध्या में राम मंदिर पर चला आ रहा सालों पुराना विवाद सुप्रीम कोर्ट ने खत्म कर दिया है, लेकिन अब ट्रस्ट को लेकर तरह-तरह के विवाद सामने आ रहे हैं. शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने रामलला ट्रस्ट बनाने की मांग करते हुए कहा है कि नये ट्रस्ट का प्रमुख उनको ही बनाया जाए. इसके अलावा उन्‍होंने भोपाल सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर पर निशाना साधने के अलावा ईवीएम पर भी सवाल उठाए हैं.

स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कही ये बात
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने गुरुवार को मीडिया से चर्चा करते हुए राम जन्म भूमि को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि अयोध्या में मुस्लिमों को 5 एकड़ जमीन देना न्यायसंगत नहीं है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शांतिपूर्ण मसले के हल किये जाने वाले बयान पर शंकराचार्य ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर सब संतुष्ट होते तो कोर्ट में मामले की सुनवाई को लेकर पुनर्विचार याचिका नहीं लगती.

स्वामी स्वरूपानंद को बनना है ट्रस्ट का प्रमुख
अब अयोध्या में मंदिर भी बनेगा मस्जिद भी. वहां लोग जाएंगे तो रेल में ही झगड़ा होने लगेगा और दो संप्रदाय जिनकी पूजा पद्दति बेहद अलग हो उन्हें एक जगह करना कितना ठीक होगा. शंकराचार्य स्वरूपानंद शंकराचार्य ने मांग उठाई है कि राम मंदिर के साथ राम लला ट्रस्ट बनाया जाए, जिसमें हमें बैठाया जाए. हम अपनी परंपरा के अनुसार मंदिर में मूर्ति तय करेंगे. जबकि किसी दूसरे ट्रस्ट को बनाने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि इलाहाबाद में आरएसएस की बैठक में तीन पुतले लगाए गए. बीच में राम, एक तरफ विवेकानंद तो दूसरी तरफ अम्बेडकर. जबकि सीता और लक्ष्मण हटा दिए गए. अगर सीता लक्ष्‍मण हटा दिए गए तो क्या ये देश की जनता को मंजूर होगा.

प्रज्ञा पर साधा निशाना
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने भोपाल सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर पर निशाना साधते हुए कहा कि महात्मा गांधी के हत्यारे को महापुरुष बताने वाली साध्वी कैसे भोपाल की सांसद बनीं. उन्होंने ईवीएम से चुनाव में बीजेपी को फायदा पहुंचने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि साध्वी को वोटों ने नहीं बल्कि ईवीएम ने जिताया है. जबकि शंकराचार्य ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने का समर्थन किया है.

(साभार : News18 हिंदी )

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