मप्र के पूर्व राज्यपाल रामनरेश यादव का निधन

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लखनऊ. मध्यप्रदेश के पूर्व राज्यपाल रामनरेश यादव का मंगलवार को लखनऊ में न‍िधन हो गया.. दरअसल पूर्व राज्यपाल रामनरेश यादव पीजीआई चिकित्सालय में भर्ती थे और वे लंबे समय से बीमार थे. उन्हें सांस  लेने के बाद पीजीआई में भर्ती करवाया गया था. करीबी सूत्रों के अनुसार, संभवतः उनका अंतिम संस्कार बुधवार को उनके गृह जिले आजमगढ़ में किया जाएगा.

बता दे कि फूलपुर तहसील के आंधीपुर गांव के रहने वाले रामनरेश यादव 1977 में जनता दल की सरकार में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री निर्वाचित हुए थे. वे 8 सितंबर 2011 में मध्यप्रदेश के राज्यपाल निर्वाचित हुए थे उनका कार्यकाल 8 सितंबर 2017 के खत्म हुआ था. गौरतलब है कि व्यापमं. मामले में उन्हें कई सवालों का सामना करना पड़ा था साथ ही उनके पुत्र शैलेष यादव को भी इस मामले में सवालों का सामना करना पड़ा था. पूर्व राज्यपाल रामनरेश यादव 89 वर्ष के थे.

रामनरेश का  राजनीतिक जीवन-

जुलाई 1928 में यूपी के आजमगढ़ में जन्मे राम नरेश को पॉलिटिक्‍स का बड़ा खिलाड़ी माना जाता था. राम नरेश पहली बार चौधरी चरण सिंह की मदद से 1977 में जनता पार्टी के सीएम बने थे. वे किसानों की आवाज उठाने के लिए जाने जाते थे. उनको राजनीतिक माहौल घर से ही मिला था, क्योंकि उनके पिता गया प्रसाद महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और डॉ. राममनोहर लोहिया के अनुयायी थे.
उन्‍होंने बीएचयू से बीए, एमए और एलएलबी की पढ़ाई की और यहीं छात्र संघ की राजनीति से भी जुड़े रहे.  इसके बाद कुछ समय के लिए वे जौनपुर के पट्टी स्थित नरेंंद्रपुर इंटर कॉलेज में प्रवक्ता भी रहे.

1953 में उन्‍होंने आजमगढ़ में वकालत की शुरुआत की. रामनरेश ने समाजवादी विचारधारा के तहत विशेष रूप से जाति तोड़ो, विशेष अवसर के सिद्धांत, बढ़े नहर रेट, किसानों की लगान माफी, समान शिक्षा, आमदनी और खर्च की सीमा बांधने, वास्तविक रूप से जमीन जोतने वालों को उनका अधिकार दिलाने, अंग्रेजी हटाओ आदि आंदोलनों को लेकर कई बार गिरफ्तारियां दीं.

इमरजेंसी के दौरान वे मीसा और डीआईआर के अधीन जून 1975 से फरवरी 1977 तक आजमगढ़ जेल और केंद्रीय कारागार नैनी, इलाहाबाद में बंद रहे. रामनरेश 1988 में राज्यसभा सदस्य बने और 12 अप्रैल 1989 को राज्यसभा के अंदर डिप्टी लीडरशिप, पार्टी के महामंत्री और अन्य पदों से त्यागपत्र देकर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की सदस्यता ली. लखनऊ स्थित अंबेडकर यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनि‍वर्सिटी का दर्जा दिलाने में भी उनका अहम योगदान था.

रामनरेश का कार्यकाल- 23 जून 1977 से 28 फरवरी 1979 तक यूपी के सीएम रहे. जून 2014 से 19 जुलाई 2014 तक छतीसगढ़ के गवर्नर रहे 26 अगस्‍त 2011 से 7 सितंबर 2016 तक मध्‍य प्रदेश के गवर्नर रहे.

बीते साल व्यापमं घोटाले में आरोपी रामनरेश के बेटे शैलेष (52) की संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी. पोस्टमार्टम करने वाली टीम ने उनकी मौत का कारण जहर बताया था.  वहीं, परिवार का कहना था कि शैलेष को ब्रेन हेमरेज हुआ था.

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