फिर अटका पिछड़ा वर्ग आयोग के दर्जे का मामला

फिर अटका पिछड़ा वर्ग आयोग के दर्जे का मामला
Facebooktwitterredditpinterestlinkedinmail

नई दिल्ली। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का मामला फिर अटक गया है। सोमवार को कई मंत्रियों की गैरहाजिरी के कारण विपक्ष राज्यसभा में संशोधन प्रस्ताव पारित करवाने में कामयाब हो गया। विपक्ष ने नियम तीन को विधेयक से हटवाने के बाद ही अपनी सहमति प्रदान की। सदन ने विपक्ष के संशोधनों के साथ विधेयक को मंजूरी दे दी। विधेयक अब वापस लोकसभा को भेजा जाएगा। 123वें संविधान संशोधन विधेयक के जरिये पिछड़े वर्ग के लिए राष्ट्रीय आयोग का गठन किया जाना है।

विपक्ष की ओर से लाए गए इन संशोधनों में धार्मिक आधार पर आरक्षण की बात की गई। अपनी संख्या बल के आधार पर विपक्ष ने इस संशोधन को पारित करा लिया। सरकार का साफ कहना था कि ऐसा कोई भी संशोधन आयोग को कानूनी तौर पर कमजोर कर देगा और यह अदालत में नहीं टिक पाएगा। जाहिर है कि अब सरकार को नए सिरे से तैयारी करके लोकसभा में बिल लाना होगा। ऐसे में आयोग को संवैधानिक दर्जा देने की पुरानी मांग अटक जाएगी।

यह बिल लोकसभा में पहले से ही पारित हो चुका है। प्रवर समिति की रिपोर्ट के बाद सोमवार को इसे राज्यसभा में पेश किया गया। विधेयक को पारित कराने के लिए 245 सदस्यीय सदन में मौजूद सांसदों में से दो तिहाई का इसके हक में होना जरूरी था। लेकिन कई मंत्रियों की गैरहाजिरी ने सरकार की मुसीबत बढ़ा दी।

मतदान के समय कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद, दिग्विजय सिंह और बीके हरिप्रसाद ने तीसरे अनुच्छेद में संशोधन की मांग उठाई। पहला संशोधन आयोग के सदस्यों की संख्या को लेकर था। विपक्ष तीन के बजाय पांच सदस्य पर जोर दे रहा था। दूसरे में राज्यों के हितों को सुरक्षित रखने की बात थी।

Facebooktwitterredditpinterestlinkedinmail

watchm7j

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *