विक्रमादित्य भारतीय न्याय व्यवस्था के महान पुरोधा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

विक्रमादित्य भारतीय न्याय व्यवस्था के महान पुरोधा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
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भोपाल : शनिवार, सितम्बर 13, 2025 : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय न्याय व्यवस्था का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। सम्राट विक्रमादित्य भारतीय न्याय व्यवस्था के महान पुरोधा थे, जिनके निर्णयों की मिसाल आज भी दी जाती है। न्याय के क्षेत्र में उनकी पहचान विश्व स्तर पर अद्वितीय थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को इंदौर में विश्व हिंदू परिषद विधि प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित अखिल भारतीय बैठक को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत के अनेक कानूनों में समयानुकूल बदलाव किए गए हैं, जो समय की आवश्यकता भी थे। न्याय व्यवस्था में मन की पवित्रता और पंचों का निष्पक्ष निर्णय ही असली न्याय है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी भारतीय संस्कृति और न्याय परंपरा पर गर्व है और न्यायालयों के निर्णयों का सबको समान रूप से पालन करना चाहिए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में कोलाहल नियंत्रण अधिनियम का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है। साथ ही खुले में मांस विक्रय पर प्रतिबंध लगाया गया है और उसका भी सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कानून सबके लिए समान है और उसके साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लव जिहाद के विषय में स्पष्ट कहा कि यह धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्ति की गरिमा के विरुद्ध है। प्रदेश में लव जिहाद करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा और उनके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि न्याय और कानून व्यवस्था में किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो। समाज के प्रत्येक वर्ग को समान न्याय मिले और जनता को यह विश्वास रहे कि मध्यप्रदेश में कानून सर्वोपरि है।

कार्यक्रम को स्वामी श्री जितेंद्रानंद जी महाराज ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर केंद्रीय विधि और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल, परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्री आलोक जी, संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन, राष्ट्रीय संयोजक विधि प्रकोष्ठ डॉ. अभिषेक अत्रे एवं विधि प्रकोष्ठ के संरक्षक न्यायमूर्ति श्री व्ही.एस. कोकजे विशेष रूप मौजूद थे।

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