धर्मेंद्र प्रधान ने उच्च शैक्षणिक संस्थानों के लिए भारत रैंकिंग 2025 जारी की

धर्मेंद्र प्रधान ने उच्च शैक्षणिक संस्थानों के लिए भारत रैंकिंग 2025 जारी की
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नई दिल्ली (PIB):केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज भारत रैंकिंग 2025 जारी की, जो 2015 में शिक्षा मंत्रालय द्वारा इस उद्देश्य के लिए तैयार किए गए। राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) को लागू करती है। इस अवसर पर शिक्षा और उत्तर पूर्व क्षेत्र विकास राज्य मंत्री श्री सुकांत मजूमदार, सचिव (उच्च शिक्षा) डॉ. विनीत जोशी, एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रो. टीजी सीताराम, एनईटीएफ, एनएएसी और एनबीए के अध्यक्ष प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे और एनबीए के सदस्य सचिव डॉ. अनिल कुमार नासा सहित उच्च शिक्षा संस्थानों के कुलपति और निदेशक उपस्थित थे।

श्री प्रधान ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि एनआईआरएफ 2025 रैंकिंग हमारे संस्थानों की मजबूती और छात्रों की प्रतिभा को दर्शाती है। उन्होंने इस वर्ष की रैंकिंग में सम्मिलित सभी संस्थानों को बधाई दी। शिक्षा मंत्री एनआईआरएफ के राष्ट्रीय मानक बनने पर प्रसन्नता व्यक्त की।

श्री प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने हमारे उच्च शिक्षा संस्थानों के विकास के लिए एक कार्ययोजना तैयार की है, जिसमें उनकी मान्यता में सुधार भी शामिल है। उन्होंने कहा कि एनआईआरएफ भारत को ज्ञान की महाशक्ति बनाने की यात्रा में एक विश्वसनीय आधार के रूप में उभरा है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सभी को मान्यता ढांचों में उच्च मानक स्थापित करने होंगे।

श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि एनआईआरएफ सर्वोत्तम मान्यता ढांचों में से एक के रूप में विकसित होगा, इसमें अधिक डेटा-संचालित दृष्टिकोण शामिल होंगे, अधिक रैंकिंग पैरामीटर और श्रेणियां शामिल होंगी तथा आगे चलकर इसमें अधिक संस्थान सम्मिलित होंगे।

श्री प्रधान ने इस बात पर जोर दिया कि हम एक बड़ी छलांग लगाने के लिए तैयार हैं और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित और आत्मनिर्भर भारत का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि हमें ‘स्वराज’ मिल गया है और अब हमें अपनी ‘समृद्धि’ के लिए संघर्ष करना है।

उन्होंने बताया कि शैक्षणिक संस्थान इसके केंद्रबिंदु में हैं और उन्हें ‘समृद्धि’ और ‘आत्मनिर्भरता’ के लिए कार्ययोजना बनाने में अग्रणी भूमिका निभानी होगी।

श्री प्रधान ने सभी शैक्षणिक संस्थानों से आह्वान किया कि वे नवाचार और उद्यमिता के लिए समृद्ध स्थान बनें, एनआईआरएफ ढांचे में सम्मिलित हों तथा वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक मांग वाले संस्थानों में परिवर्तित होने का लक्ष्य रखें।

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