मुख्यमंत्री ने पानी बचाने डबरी-तालाब और कुंआ निर्माण पर दिया जोर

मुख्यमंत्री ने पानी बचाने डबरी-तालाब और कुंआ निर्माण पर दिया जोर
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रायपुर :मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य में पानी बचाने और जल संरक्षण के लिए मनरेगा के तहत अधिक से अधिक संख्या में डबरी, तालाब और कंुओं का निर्माण किए जाने की जरूरत पर बल दिया है।
डॉ. सिंह आज यहां विधानसभा परिसर स्थित समिति कक्ष में छत्तीसगढ़ ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद की बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत हो रहे कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। डॉ. सिंह ने सरगुजा और बस्तर संभागों में मनरेगा के तहत कम से कम पांच-पांच सौ कुंए बनवाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन कुंओं में सोलर पम्प लगाकर पेयजल आपूर्ति भी की जा सकती है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मनरेगा के तहत होने वाले वृक्षारोपण कार्यों में अर्जुन के एक करोड़ पौधे लगवाने के भी निर्देश दिए। डॉ. सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अर्जुन के वृक्षों पर रेशम कृमिपालन के जरिए अधिक से अधिक संख्या में कोसा ककून तैयार होंगे, जिससे ग्रामीणों को अतिरिक्त आमदनी का एक अच्छा जरिया मिलेगा और राज्य में रेशम उद्योग का भी विकास होगा। बैठक में बताया गया कि मनरेगा के तहत राज्य में चालू वित्तीय वर्ष 2016-17 में आज तक की स्थिति में बीस लाख 59 हजार परिवारों को लगभग 900 मानव दिवस का रोजगार दिया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मनरेगा श्रमिकों की नियमित मजदूरी भुगतान पर विशेष रूप से ध्यान देने के निर्देश दिए।
डॉ. सिंह ने इस बात पर खुशी जताई कि पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा के तहत राज्य में जल संरक्षण के लिए पिछले वित्तीय वर्ष 2015-16 में लगभग तीन हजार और वर्तमान वित्तीय वर्ष 2016-17 में करीब चार हजार तालाबों का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है। इससे लगभग 33 हजार हेक्टेयर में सिंचाई हो सकेगी और भू-जल स्तर में भी वृद्धि होगी। इन दो वर्षों में क्रमशः पांच हजार 851 और 1475 तालाबों का गहरीकरण किया गया है। इस दौरान दोनों वित्तीय वर्षों में साढ़े चार हजार से ज्यादा कुंए और करीब साढ़े पांच सौ चेकडेम भी बनवाए गए हैं। सिंचाई नहरों की लाईनिंग का कार्य भी मनरेगा में लिया जा रहा है। वर्ष 2015-16 में नहर लाईनिंग के 1324 कार्य पूर्ण किए गए, जिनसे छह हजार 301 हेक्टेयर में सिंचाई क्षेत्र का विस्तार हुआ, वहीं वर्ष 2016-17 में नहर लाईनिंग के 636 कार्य पूर्ण कर 1308 हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता विकसित की गई। नये वित्तीय वर्ष 2017-18 में 20 हजार डबरियों के निर्माण का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री ने विभाग द्वारा पौध रोपण के लिए बनाई गई लगभग चार वर्ष की कार्य योजना के तहत नर्सरियों का भी निर्माण किया जा रहा है। वर्ष 2016-17 में 330 नर्सरी कार्यों के लिए 23 करोड़ 86 लाख रूपए मंजूर किए गए हैं। इन नर्सरियों में एक करोड़ 86 लाख पौधे तैयार किए जा रहे हैं, जो आगामी वर्षों में वृक्षारोपण के लिए होंगे, जिनकी ऊंचाई छह से आठ फिट तक हो जाएगी, जिन्हें राज्य भर में वृक्षारोपण के लिए उपयोग में लाया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने इस योजना की प्रशंसा करते हुए इसे अपने किस्म की एक अच्छी योजना बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि मनरेगा के तहत नर्सरी विकास की इस योजना की निरंतर समीक्षा होनी चाहिए और यह भी देखना चाहिए कि पौधे किस प्रकार तैयार हो रहे हैं। उन्होंने इस कार्य में वन विभाग के साथ समन्वय की जरूरत पर भी बल दिया। डॉ. सिंह ने मनरेगा के तहत राज्य की सहकारी समितियों के उपार्जन केन्द्रों में धान के सुरक्षित संग्रहण के लिए चबूतरा निर्माण कार्य की भी समीक्षा की।
अधिकारियों ने बैठक में बताया कि अब तक 890 चबूतरों का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है। नये वित्तीय वर्ष 2017-18 में बीस हजार निजी डबरियों का निर्माण करवाया जाएगा। इसके अलावा दो हजार नये आंगनबाड़ी भवन बनावाए जाएंगे और स्वच्छ भारत मिशन के तहत चार लाख 57 हजार घरों में शौचालय निर्माण भी करवाया जाएगा। धान भण्डारण के लिए 463 चबूतरे बनवाए जाएंगे। बैठक में पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री श्री अजय चंद्राकर, कृषि और जल संसाधन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल, वन मंत्री श्री महेश गागड़ा, श्रम तथा खेल और युवा कल्याण मंत्री श्री भईयालाल राजवाड़े, राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष श्री सुनिल कुमार, मुख्य सचिव श्री विवेक ढांड, पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री एम.के. राउत और सचिव श्री पी.सी. मिश्रा तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। अशासकीय सदस्यों में श्रीमती जबिता मंडावी, श्रीमती माया बेलचंदन, श्रीमती सरला कोसरिया और सर्वश्री समीउल्ला खान, मनोज चंद्राकर और दीपक साहू भी बैठक में मौजूद थे।

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