सीट बंटवारे की डील में जेडीयू सिकंदर, बीजेपी के जाल में फंसे 'सन ऑफ मल्‍लाह', कुछ दिन में बिन पानी तड़पेंगे जानिए कैसे?

सीट बंटवारे की डील में जेडीयू सिकंदर, बीजेपी के जाल में फंसे 'सन ऑफ मल्‍लाह', कुछ दिन में बिन पानी तड़पेंगे जानिए कैसे?
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सुमन केशव सिंह, पटना: बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर एनडीए में जारी सरफुटव्‍वल अब खत्‍म हो चुका है। बीजेपी और जेडीयू ने परिषद की 24 सीटों का आपस में बंटवारा कर लिया। शुरू से ही बीजेपी अपने सीटिंग 13 सीटों पर चुनाव लड़ना चाह रही थी और जेडीयू भी 11 सीटों की डिमांड या 50: 50 फॉर्म्यूला पर चुनाव लड़ने की जिद पर अड़ी थी। इसके अलावा हम, वीआइपी और RLJP पशुपति पारस भी दावेदारी ठोंक रहे थे।

हिट रही नीतीश की पॉलिटिकल इंजीनियरिंग
राजनीति के इंजीनियर नीतीश कुमार ने एक तरफ अपने सहियोगी पशुपति पारस की पार्टी RLJP को बीजेपी हिस्‍से की एक सीट दिलवा दी। तो वहीं इसी तीर से कई निशाने साध लिए हैं। उन्‍होंने अपने विरोधी चिराग पासवान को उनके खिलाफ बोलने की सजा दी तो वहीं nda में अपनी औकात भी दिखाई। दूसरी ओर अपने सहियोगी पार्टी को बीजेपी में घुसाकर उसे मजबूत कर दिया। तो वहीं अपने 50:50 के फॉर्म्यूला को भी साध लिया। इतना ही नहीं जेडीयू ने बीजेपी के बड़े भाई की भूमिका के दंभ को भी बिना आहत किए बराबरी कर अपनी बात भी मनवा ली।

बीजेपी के जाल में फंसे ‘सन ऑफ मल्‍लाह’वैसे तो वीआइपी के प्रमुख मुकेश सहनी खुद को सन ऑफ मल्‍लाह कहते हैं लेकिन विधान परिषद चुनाव में वो इस बार बीजेपी के राजनीतिक दांव में बुरी तरह फंस गए। मुकेश सहनी रह-रह कर अपनी दावेदारी ठोक थे। एनडीए गठबंधन में खुद को बराबर का हिस्‍सेदार बता रहे थे। बीजेपी पर दबाव बनाने के लिए वो लगातार बयानबाजी कर रहे थे। उनके बोल अब उन्‍हीं पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। मुकेश सहनी भले ही बीजेपी को लगातार आंख दिखा रहे होंं और घुड़कियां दे रहे हों, लेकिन वो मंत्री बीजेपी के कोटे से बने हैं। बीजेपी ने सुशील कुमार मोदी की परिषद में खाली हुई सीट देकर उन्‍हें मंत्री बनाया। लेकिन मुकेश सहनी लगातार ये बयानबाजी कर रहे थे कि वो नीतीश कुमार के साथ हैं।

तारकिशोर प्रसाद ने पहले ही खारिज कर दी थी सहनी की दावेदारी, क्‍या खत्‍म होगा खेल?
इधर, उनकी दावेदार को डिप्‍टी सीएम तारकिशोर प्रसाद ने यह कहकर खारिज कर पहले ही खारिज दिया कि बिना चुनाव लड़े उन्‍हें परिषद का सदस्‍य बनाकर उन्‍हें उनकी हिस्‍सेदारी दे दी गई है। बात यहीं तक खत्‍म नहीं होती। जिस खाली हुई सीट के सहारे ‘सन ऑफ मल्‍लाह’ मंत्री हैं उनका कार्यकाल इसी साल खत्‍म हो रहा है। सहनी न तो विधायक ही हैं और न परिषद की सदस्‍यता ही रहेंगे। तो बड़ा सवाल है कि वो मंत्री कैसे रहेंगे?

फायदे के सौदे में जेडीयू, परिषद चुनाव में पसारे पांव
इधर, विधान परिषद की 75 सीटों में 23 सीटों पर जेडीयू का कब्‍जा है। वहीं जिन 24 सीटों पर चुनाव होने हैं उनमें 8 सीटें जेडीयू की हैं। देखा जाए तो सीट बंटवारे में जेडीयू ने पांव ही नहीं पसारे अपना आकार भी बड़ा किया है। बहरहाल, कुल मिलाकर जेडीयू ने 4 सीटों के फायदे का सौदा किया है वहीं बीजेपी भले ही 13 सीटें लेकर बड़ा भाई दिखे लेकिन सीट बंटवारे में दोनों पार्टियां बराबर हैं। बीजेपी को एक सीट का नुकसान हुआ है तो वहीं जेडीयू 8 से 12 होकर सीट बंटवारे के डील की सिकंदर है।

माझी की पार्टी ने कहा, सीट नहीं मिली तो क्‍या हुआ NDA मजबूत है
माझी की पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि दो सीटों की वजह से nda टूट जाएगा तो वो लोग ये गलत सपना देख रहे हैं। पार्टी की तरफ से जारी बयान में कहा गया नीतीश के नेतृत्‍व में बिहार तरक्‍की कर रहा है। विधान परिषद चुनाव में हमारी तैयारी नहींं थी। फिलहाल यही कही कह कर परिवार के लोगों के लिए हित साधने वाले दबाव की राजनीति के मास्‍टर जीतन राम माझी ने दो सीटों की मांग पर चुप्‍पी साध ली है।

फोटो और समाचार साभार : नवभारत टाइम्स

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