नीति आयोग के गठन से देश में आर्थिक सुधारों की नई क्रांति: डॉ. रमन सिंह

नीति आयोग के गठन से देश में आर्थिक सुधारों की नई क्रांति: डॉ. रमन सिंह
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रायपुर: मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र द्वारा नीति आयोग का गठन करने के बाद देश में आर्थिक सुधारों की एक नई क्रांति आ गयी है। मुख्यमंत्री ने आज यहां नया रायपुर में राज्य योजना आयोग के नये भवन का लोकार्पण करने के बाद  ‘राज्यों के योजना संगठनों की भूमिका पर राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए इस आशय के विचार व्यक्त किए। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। राज्य निर्माण के बाद छत्तीसगढ़ में इस प्रकार का यह पहला सम्मेलन था, जिसमें देश के 18 राज्यों के राज्य योजना आयोगों और मंडलों के पदाधिकारी शामिल हुए।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री अरविंद पनगढ़िया ने सम्मेलन में विगत तेरह वर्ष में छत्तीसगढ़ में हुए विकास कार्यों और विभिन्न योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की विशेष रूप से प्रशंसा की। श्री पनगढ़िया ने कहा- मैं राज्यों में जाता हूं, तो छत्तीसगढ़ का उदाहरण देता हूं। नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने पिछले तेरह साल में सामाजिक क्षेत्र और आर्थिक अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय और सराहनीय कार्य किया है। इस बात की चर्चा जरूर करता हूं कि सभी मुख्यमंत्री राज्यों में अच्छा काम कर हैं और उनमें डॉ. रमन  सिंह अग्रणी हैं। श्री पनगढ़िया ने यह भी कहा कि डॉ. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ में विशेष रूप से सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं में कल्पनाशीलता के साथ नवाचारों की शैली में सराहनीय कार्य किया है। उनके द्वारा छत्तीसगढ़ के विकास के लिए अनेक योजनाएं दूरदर्शिता के साथ अपने समय से आगे की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनायी गयी हैं। श्री पनगढ़िया ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नीति आयोग के इस राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन अपने आप में काफी महत्वपूर्ण हो गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इस अवसर पर कहा- यह महत्वपूर्ण सम्मेलन एक ऐसे समय में हो रहा है, जब देश में आर्थिक सुधारों का क्रांतिकारी दौर चल रहा है। मुख्यमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के विजन-2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके इस दूरगामी सोच वाले दृष्टिकोण से हमने भी प्रेरणा ली है। मुख्यमंत्री ने कहा-केंद्रीय राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत किए जाने के बाद राज्यों के विकास योजनाओं के लिए पहले की तुलना में ज्यादा राशि मिल रही है। डॉ. सिंह ने नीति आयोग के उपाध्यक्ष से आग्रह किया कि स्थानीय परिस्थितियों और भौगोलिक दशाओ को ध्यान में रखकर राशि का आवंटन किया जाना चाहिए। सामान्य इलाके में जो बाँध 20 करोड़ में बन जाता है, उसे बस्तर और सरगुजा जैसे पहाड़ी तथा वनों से परिपूर्ण इलाकों में बनाने पर लगभग चार गुना ज्यादा लागत आ जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा- छत्तीसगढ़  में 32 प्रतिशत आदिवासी निवासरत हैं। लगभग 45 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है। बस्तर और सरगुजा में आवासीय विद्यालय ही सफल हैं तो इन स्थानों में आवासीय स्कूलों के लिए फंड दिया जाना चाहिए। डॉ. सिंह ने कहा-छत्तीसगढ़ ने देश का पहला खाद्य सुरक्षा कानून बनाकर इसे पोषण सुरक्षा से भी जोड़ा है।  उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की जन-धन योजना और आधार योजना की राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धियों की चर्चा करते हुए कहा कि इसके लिए प्रधानमंत्री बधाई के पात्र हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जन-धन योजना और आधार कार्ड की ये दोनों योजनाएं निकट भविष्य में देश के विकास की बुनियाद बनेंगी। मुख्यमंत्री ने देश में डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री के डिजिटल भारत अभियान की भी तारीफ की।
डॉ. सिंह ने कहा- एक गांव ,कई पारा टोला में बंटे होने के कारण विद्युतीकरण में ज्यादा खर्च आता है। आबादी के आधार पर विद्युतीकरण के लिए के लिए आबंटित राशि की तुलना में यहां की परिस्थितियों में ज्यादा लागत आता है। पीडीएस प्रणाली से 60 लाख परिवारो को खाद्यान सुरक्षा मुहैया करा रहे हैं। इससे मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर एवं कुपोषण में कमी आई है। छत्तीसगढ़ के वनवासी लघु वनोपज को नमक के बदले अदला-बदली करते थे। हम गरीब परिवारों को नमक  उपलब्ध करा रहे हैं ताकि उनके वनोपज को वाजिब दाम मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम किसानों से हर साल लगभग सात हजार करोड़ का धान खरीदते हैं। उसका कस्टम मिलिंग कराते हैं फिर एफसीआई को ट्रांसफर करते हैं। इस प्रक्रिया में अवधि ज्यादा होने के कारण राज्य को आर्थिक नुक्सान होता है। छत्तीसगढ़ में विभिन्न सेक्टर, कृषि, उद्योग, युवा, इंफ्रास्ट्रक्चर आदि के लिए टास्क फोर्स का गठन किया गया है। आगामी 20 सालो के लिए योजना बनाई जा रही है। मुख्यमंत्री जनधन, आधार और मोबाइल को कनेक्ट करने के लिए छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा जरूरत इंटरनेट कनेक्टिविटी की है। उन्होंने इस कार्य के लिए राज्यो को बजट देने की मांग की सभी ग्राम पंचायतो तक इंटरनेट कनेक्टिविटी तेजी से पहुंचाना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत डेढ़ सौ साल के इतिहास में छत्तीसगढ़ में सिर्फ लगभग 1400 किमी रेललाइन बिछाई गयी थी। हम अगले दस साल में 1200 किमी रेलमार्ग बनाएंगे। उन्होंने कहा- इस समय लगभग 450 किमी रेललाइन बिछाने का काम चल रहा है। हमने राज्य शासन , रेल मंत्रालय, पीएसयू के साथ मिलकर संयुक्त उपक्रम बनाया है और इसके माध्यम से रेल प्रोजेक्ट को पूरा करा रहे हैं। डॉ. सिंह ने कहा- हमने बस्तर सभाग के 7 जिलों में मोबाइल एवं इंटरनेट कनेक्टिविटी बढाने बस्तर नेट प्रोजेक्ट प्रारंभ किया है। डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड से राज्य को हर साल करीब 1200 करोड़ रूपए मिलने की शुरूआत हो गयी है। विकास कार्यो में मदद मिली है। छत्तीसगढ़ में खेती के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आ रहा है। स्प्रिंकलर, ड्रिप का इस्तेमाल बढा है। मक्का, जैविक खेती की ओर किसानों का रुझान बढा है। लघु वनोपज का वेल्यु एडिशन हो रहा है। डॉ. सिंह ने कहा- प्रदेश के युवाओं को हुनरमद बनाने और रोजगार से जोड़ने के लिए सभी 27 जिलो में लाइवलीहुड कालेज प्रारंभ किया गया है। युवाओं को कौशल विकास का अधिकार देने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है। सम्मेलन को छत्तीसगढ़ राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष श्री सुनिल कुमार ने भी सम्बोधित किया। छत्तीसगढ़ सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति तथा योजना विभाग के मंत्री श्री पुन्नूलाल मोहले, नीति आयोग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिताभ कांत, उत्तर प्रदेश राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष श्री एन.सी. वाजपेयी, असम राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष श्री डी.के. बरठाकुर, आंध्रप्रदेश योजना आयोग के उपाध्यक्ष श्री सी.के. कुटम्बाराव, बिहार राज्य योजना आयोग के सदस्य श्री ए.एन.पी. सिन्हा, मध्यप्रदेश योजना आयोग के उपाध्यक्ष श्री सी. कश्यप, मेघालय राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष श्री ग्रिथाल्सन अरेंघ सहित पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, तेलांगाना, तमिलनाडु, गोवा, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, गुजरात आदि राज्यों के प्रतिनिधि सम्मेलन में शामिल हुए। छत्तीसगढ़ की सामाजिक कार्यकर्ता, पद्मश्री सम्मानित श्रीमती फूलबासन यादव ने भी सम्मेलन में हिस्सा लिया।

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