पोलियो की तर्ज पर चलेगा मीजल्स-रूबेला टीकाकरण अभियान

पोलियो की तर्ज पर चलेगा मीजल्स-रूबेला  टीकाकरण अभियान
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रायपुर-स्वास्थ्य विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ में मीजल्स-रूबेला को शत-प्रतिशत नियंत्रण के लिए पोलियो टीकाकरण अभियान के तर्ज पर मीजल्स-रूबेला टीकाकरण अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है। इस संबंध में आज राजधानी रायपुर में ‘‘राज्य स्तरीय मीजल्स-रूबेला टीकाकरण अभियान का संवेदीकरण’ विषय पर आयोजित एकदिवसीय कार्यशाला सम्पन्न हुई।

पद्मश्री सम्मान से सम्मानित डॉ. अरूण दाबके और डॉ. पुखराज बाफना ने दीप प्रज्ज्वलित का कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सहयोग से आयोजित की गई। कार्यशाला में जिला अस्पताल रायपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.के. सांडिल्य, आई.एम.ए. के डॉ. अशोक त्रिपाठी, डा.ॅ महेश सिन्हा, आई.ए.पी. के डॉ. शारदा फूलझेले, डॉ. कविन्द्र साराभाई डॉ. अंजू पारेख, लॉयंस क्लब के श्री राजेन्द्र तिवारी, विश्व स्वास्थ्य संगठन के डॉ मनीष गवान्डे, यूनिसेफ के डॉ. अजय टकरू,यू.एन.डी.पी. के श्री

अंशुमन, एस.एच.आर.सी के डॉ. प्रबीर चटर्जी सहित प्रदेश के प्रतिष्ठित डॉक्टर्स और स्चयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधिगण उपस्थित थे। कार्यशाला में राज्य नोडल अधिकारी टीकाकरण डॉ. अमर सिंह ठाकुर ने रूबेला-मीजल्स टीकाकरण के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह एक संक्रामक रोग है। एक संक्रमित व्यक्ति के द्वारा खांसने और छींकने से फैलता है।

स्त्री को गर्भावस्था के आरंभ में रूबेला का संक्रमण हो सकता है, जन्मजात रूबेला सिंड्रोम विकसित हो सकता है जो भू्रण और नवजात शिशुओं के लिये गंभीर एवं घातक साबित भी हो सकता है, 9 माह से 15 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों को मीजल्स-रूबेला का टीकाकरण किया जाना आवश्यक है।

अभियान में उन बच्चों को भी टीका लगाया जायेगा जिन्हें पहले से खसरा-रूबेला का टीका लग चुके हो अथवा कभी उनको खसरा-रूबेला संक्रमण हुआ हो। कार्यशाला मंे बताया कि प्रदेश के 85 लाख बच्चों को मीजल्स-रूबेला टीकाकरण करने के लिए राज्य के स्कूलों और आंगनबाड़ी केन्द्रों में व्यापक कैपेंन चलाकर टीकाकरण किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त राज्य के एक भी बच्चे मजील-रूबेला टीकाकरण से एक भी बच्चा न छूटे इसके लिए सोशल मीडिया, फेसबुक, टिवट्र के जरिए प्रचार- प्रसार किया जाएगा। इस संबंध मंे चिकित्सकों और स्वास्थ्य अमलों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि मीजल्स-रूबेला अभियान में 9 माह से 15 वर्ष तक के उम्र तक के बच्चों को शामिल किया गया है।

मजील्स-रूबेला टीकाकण के लिए राज्य स्तर पर तैयारी पूरी कर ली गई हैं। जिला स्तर पर अभियान को सफल बनाने के लिए तैयारी की जा रही है। कार्यशाला में बताया गया कि अभियान के दौरान निर्धारित आयु सीमा के बच्चों को ही यह टीका लगे। सके।

महिला  समिति, विभिन्न समाज के महिला मंडल के माध्यम से सोशल मीडिया ने अभियान के बारे में जानकारी दी जाए। राज्य, जिले व ब्लॉक स्तर के स्वास्थ्य अधिकारियों को सोशल मीडिया के संचालन तथा मेटर बनाने के तरीके के बारे में जानकारी देना, ताकि वे अपने-अपने जिले में इस अभियान का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन कर सके।

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