एलीफेंट रिजर्व के लिए चिन्हित क्षेत्र में बदलाव क्यों किया? मुख्यमंत्री जवाब दें : डॉ. महंत

एलीफेंट रिजर्व के लिए चिन्हित क्षेत्र में बदलाव क्यों किया? मुख्यमंत्री जवाब दें : डॉ. महंत
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रायपुर। कोरबा जिले के रामपुर विधानसभा के दर्जनों गांवों में पहुंची छग कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष व पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. चरणदास महंत की हसदेव जन यात्रा का जगह-जगह ग्रामीणों और आदिवासियों के साथ-साथ महिलाओं ने परंपरागत आत्मीय स्वागत किया।

हसदेव जन यात्रा की महिलाओं ने आरती उतार कर अगुवानी की, ग्रामीणों ने डॉ. महंत को अनेक समस्याओं सहित हाथियों के हमले से होने वाली जन-धन हानि के साथ-साथ रामपुर क्षेत्र में बदहाल चिकित्सा व्यवस्था के बारे में अवगत कराया।

मंगलवार को कोरबा के कोसाबाड़ी स्थित सिद्ध हनुमान मंदिर में मत्था टेकने के बाद छग कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष व पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. चरणदास महंत रामपुर : विधानसभा के ग्राम मड़वारानी पहुंचे। यहां आदिशक्ति मां मड़वारानी देवी का दर्शन कर यात्रा के लिए रवाना हुए। ग्राम कोथारी, पचपेड़ी, सोहागपुर, मुकुंदपुर, पहाडग़ांव, टोंडा, कर्रापाली, सराईपाली, उमरेली में जन यात्रा का ग्रामीणों ने करमा नृत्य व बैण्ड बाजा के साथ स्वागत किया।

जगह-जगह युवाओं ने डॉ. महंत को फूल मालाओं से लाद दिया। गांवों में आयोजित जन सभा व ग्रामीण क्षेत्रों में चौपाल के साथ-साथ आयोजित सभाओं को संबोधित करते हुए डॉ. महंत ने कहा कि रामपुर विधानसभा क्षेत्र के लगभग 96 गांव अति संवेदनशील के साथ-साथ हाथियों के उत्पात से प्रभावित हैं।

इन क्षेत्रों में वर्ष- 2000 में मात्र 4 हाथी थे जो 2017 में बढ़कर 60 से अधिक हो गए हैं। हाथियों के उत्पात से हजारों एकड़ कृषि भूमि के साथ सैकड़ों मकान प्रभावित हुए हैं और तीन दर्जन से अधिक ग्रामीणों की जान गई है, बावजूद सरकार ने हाथी प्रभावित क्षेत्र की सुध नहीं ली है। हाथी अभ्यारण्य (एलीफेंट रिजर्व) बनाने के प्रयास को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने जान बूझकर प्रभावित किया है।

हाथी अभ्यारण्य के चिन्हित क्षेत्र में आखिर बदलाव किन कारणों से किया इसका जवाब मुख्यमंत्री को देना चाहिए। हाथी अभ्यारण्य प्रस्तावित क्षेत्र में कोयला खदान खोले जाने का ग्रामीण पुरजोर विरोध कर रहे हैं लेकिन सरकार ग्रामीणों की चिन्ता को छोड़कर पूंजीपतियों को जमीन देने तुली हुई है, जिसका विरोध किया जाएगा।

रामपुर क्षेत्र में हालात यह है कि ग्रामीण घरों से नहीं निकल पा रहे हैं और वनोपज संग्रहण प्रभावित होने से उनका जीविकोपार्जन प्रभावित हुआ है। भालुओं के हमले से सुरक्षित करने जामवंत परियोजना की दिशा में जल्द पहल करने के साथ-साथ फसल क्षतिपूर्ति का स्लैब बढ़ाये जाने और हाथी के हमले से हुए ग्रामीणों की मौत पर उनके परिजनों को वन विभाग में नौकरी देने, वनों की कटाई पर प्रतिबंध लगाने की मांग डॉ. महंत ने की है।

डॉ. महंत ने रामपुर क्षेत्र में बदहाल चिकित्सा व्यवस्था के लिए भाजपा सरकार और उनके मंत्रियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि प्रदेश में काबिज कद्दावर मंत्री इस आदिवासी क्षेत्र की सुध नहीं ले रहे हैं। पूरे रामपुर क्षेत्र में एक भी ऐसा अस्पताल नहीं है कि ग्रामीण गंभीर हालातों में यहां पर अपना ईलाज करा सकें। उन्हें जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है।

रामपुर क्षेत्र के र्ग्रामीणों ने डॉ. महंत को गर्मी के अलावा दूसरे मौसम में भी होने वाले पेयजल संकट से अवगत कराते हुए निराकरण की मांग की। ग्रामीणों ने बताया कि हैण्डपंप के साथ-साथ बनाये गए टंकियों में पानी नसीब नहीं है, पूरे क्षेत्र में पानी की भीषण समस्या विद्यमान है। हसदेव जनयात्रा के सातवें दिन डॉ. चरणदास महंत, पीसीसी सचिव गोपाल थवाईत अनेक ग्रामों में पहुंचकर पदयात्रा के माध्यम से ग्रामीणों से रूबरू हुए।

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