जाधव की फांसी पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की रोक – Watchnews24x7.com

जाधव की फांसी पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की रोक

जाधव की फांसी पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की रोक
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नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय न्यायालय द्वारा कुलभूषण जाधव की फांसी की सजा पर रोक लगाये जाने के साथ ही भारत ने गुरुवार (18 मई) को राहत की सांस ली. राजनेताओं ने इस फैसले की सराहना की तो वहीं जाधव के दोस्तों ने मिठाई खिलाकर और पटाखे फोड़कर अपनी खुशी का इजहार किया. अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में भारत की तरफ से पेश हुये वकील हरीश साल्वे द्वारा जाधव के बचाव में पुख्ता दलीलें दिये जाने के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और तमाम दूसरे नेताओं ने उनकी प्रशंसा की.

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की 11 न्यायाधीशों की पीठ ने जैसे ही एकमत से जाधव की फांसी की सजा पर रोक का फैसला दिया गया. प्रधानमंत्री मोदी ने तत्काल विदेश मंत्री स्वराज को फोन कर उन्हें धन्यवाद दिया और पूर्व नौसैनिक अधिकारी की पैरवी पुख्ता तरीके से करने के लिये साल्वे के प्रयासों की सराहना की. संभवत: राहत में दिखीं सुषमा स्वराज ने लोगों को इस फैसले की जानकारी देने के लिये ट्विटर का सहारा लिया. उन्होंने ‘बड़ी राहत’ का जिक्र करते हुये कहा कि जाधव को फांसी की सजा से बचाने के लिये ‘कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जायेगी’.

उन्होंने ट्वीट किया, ‘आईसीजे का आदेश कुलभूषण जाधव के परिवार और भारत के लोगों के लिये बड़ी राहत के तौर पर आया.’ सुषमा ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, ‘हम आईसीजे के सामने भारत का पक्ष इतने प्रभावी तरीके से रखने के लिये हरीश साल्वे के शुक्रगुजार हैं. मैं राष्ट्र को भरोसा दिलाती हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम (उन्हें) बचाने के लिये कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ेंगे.’

इस मामले में भारत की तरफ से पैरवी के लिये महज एक रुपये का सांकेतिक शुल्क लेने वाले वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि मामले में जिरह करने के दौरान उन्हें सकारात्मक उर्जा और न्यायधीशों से जुड़ाव महसूस हो रहा था. उन्होंने कहा, ‘40 वर्षों से वकालत कर रहे एक वकील के तौर पर आपको यह महसूस हो जाता है कि न्यायधीशों की प्रतिक्रिया कैसी है. जब मैं मामले में जिरह कर रहा था तो मुझे सकारात्मक उर्जा महसूस हो रही थी. मुझे महसूस हुआ कि न्यायाधीश जुड़ रहे थे. मैं संतुष्ट महसूस कर रहा हूं. जब दूसरा पक्ष जिरह कर रहा था तो मुझे वैसा जुड़ाव नहीं लग रहा था.’

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