जस्टिस दीपक मिश्रा होंगे देश के 45वें मुख्य न्यायाधीश, आज शपथ ग्रहण करेंगे

जस्टिस दीपक मिश्रा होंगे देश के 45वें मुख्य न्यायाधीश, आज शपथ ग्रहण करेंगे
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नई दिल्ली: जस्टिस दीपक मिश्रा देश के 45वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर आज शपथ ग्रहण करेंगे. राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद उन्हें शपथ दिलाएंगे. चीफ जस्टिस जेएस खेहर 27 अगस्त को रिटायर हो गए हैं. जस्टिस दीपक मिश्रा करीब 13 महीने चीफ जस्टिस के पद पर रहेंगे. जस्टिस दीपक मिश्रा ने कई ऐतिहासिक फैसले दिए हैं. आजाद भारत में पहली बार सुप्रीम कोर्ट जब रात में बैठी थी तो जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई में ही बेंच ने मुंबई ब्लास्ट के दोषी याकुब मेनन की अर्जी को पूरी रात सुनवाई के बाद खारिज किया था.
कई ऐतिहासिक फैसले दे चुके हैं देश के नए चीफ जस्टिस
जस्टिस दीपक मिश्रा का जन्म 3 अक्टूबर 1953 को हुआ था. 14 फरवरी 1977 में उन्होंने उड़ीसा हाईकोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस शुरू की थी. 1996 में उन्हें उड़ीसा हाईकोर्ट का एडिशनल जज बनाया गया और बाद में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट उनका ट्रांसफर किया गया.

2009 के दिसंबर में उन्हें पटना हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया. फिर 24 मई 2010 में दिल्ली हाईकोर्ट में बतौर चीफ जस्टिस उनका ट्रांसफर हुआ. 10 अक्टूबर 2011 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया.

अपने लंबे कार्यकाल में जस्टिस दीपक मिश्रा ने कई ऐतिहासिक फैसले दिए हैं. पिछले साल 3 मई को जस्टिस दीपक मिश्रा ने आपराधिक मानहानि से संबंधित कानूनी प्रावधान के संवैधानिक वैधता को सही ठहराया था. जस्टिस मिश्रा ने कहा था कि विचार अभिव्यक्ति का अधिकार असीमित नहीं है.

30 नवंबर 2016 को दिए अपने ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने कहा था कि पूरे देश में सिनेमा घरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान चलाया जाए और इस दौरान सिनेमा हॉल में मौजूद तमाम लोग खड़े होंगे. राष्ट्रगान के सम्मान में तमाम लोगों को खड़ा होना होगा.

मुंबई ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन को फांसी की सजा जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने ही सुनाई थी. आजाद भारत में पहली बार सुप्रीम कोर्ट में रात भर सुनवाई चली थी. सुप्रीम कोर्ट में रात के वक्त सुनवाई करने वाले बेंच की अगुवाई जस्टिस दीपक मिश्रा ने ही की थी. दोनों पक्षों की दलील के बाद याकूब की अर्जी खारिज की गई थी और फिर तड़के उसे फांसी दी गई थी.

इसी साल 5 मई को बहुचर्चित निर्भया गैंग रेप केस में तीनों दोषियों की फांसी की सजा को जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने बरकरार रखा था. जस्टिस दीपक मिश्रा ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में पुलिस से कहा था कि वह एफआईआऱ दर्ज करने के 24 घंटे बाद उसे वेबसाइट पर अपलो़ड करें.

जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई में स्पेशल बेंच बनी है जो अयोध्या मामले की सुनवाई करे. इसके अलावा बीसीसीआई रिफार्म, सहारा सेबी मामला भी जस्टिस मिश्रा की बेंच सुन रही है.

 

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