अनलॉक : स्कूलों को पुन: खोलने के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है

अनलॉक : स्कूलों को पुन: खोलने के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है
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नई दिल्ली : गृह मंत्रालय (एमएचए) ने कंटेनमेंट (सील) जोन के बाहर के क्षेत्रों में कई और गतिविधियों को फि‍र से खोलने के लिए आज नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 01 अक्टूबर, 2020 से लागू होने वाले इन दिशा-निर्देशों के तहत विभिन्‍न गतिविधियों को फिर से खोलने की प्रक्रिया को और आगे बढ़ाया गया है। आज जारी किए गए नए दिशा-निर्देश दरअसल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त विभिन्‍न जानकारियों एवं सुझावों और संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों के साथ किए गए व्यापक परामर्श पर आधारित हैं।

नए दिशा-निर्देशों की मुख्य बातें

कंटेनमेंट जोन के बाहर के क्षेत्रों में 15 अक्टूबर 2020 से जिन गतिविधियों को फि‍र से खोलने की अनुमति दी गई है उनमें निम्‍नलिखित शामिल हैं:

  • सिनेमा/थिएटर/मल्टीप्लेक्स को फि‍र से खोलने की अनुमति होगी जिनमें दर्शकों के बैठने की क्षमता अधिकतम 50 प्रतिशत तक ही होगी। इसके लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मानक परिचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की जाएगी।
  • कंपनियों के स्‍तर पर आयोजित होने वाली ‘बिजनेस टू बिजनेस (बी2बी) प्रदर्शनियों’ को पुन: खोलने की अनुमति दी जाएगी, जिसके लिए वाणिज्य विभाग द्वारा एसओपी जारी की जाएगी।
  • खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिए इस्तेमाल किए जा रहे स्विमिंग पूल को भी फि‍र से खोलने की अनुमति दी जाएगी, जिसके लिए मानक परिचालन प्रक्रिया (एसओपी) युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय (एमओवाईएएंडएस) द्वारा जारी की जाएगी।
  • मनोरंजन पार्कों और इसी तरह के स्थानों को भी पुन: खोलने की अनुमति दी जाएगी, जिसके लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्‍ल्‍यू) द्वारा एसओपी जारी की जाएगी। 

स्कूल, कॉलेज, शिक्षा संस्थान और कोचिंग संस्थान को खोलना

  • स्कूलों और कोचिंग संस्थानों को फिर से खोलने के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को 15 अक्टूबर 2020 के बाद क्रमबद्ध तरीके से एक निर्णय लेने के लिए छूट दी गई है। स्थिति के मूल्यांकन के आधार पर संबंधित स्कूल/संस्थान के प्रबंधन के साथ परामर्श करके निर्णय लिया जाएगा और ये निम्नलिखित शर्तों के अधीन होगा:
  • ऑनलाइन/ डिस्टेंस लर्निंग, शिक्षण का पसंदीदा तरीका बना रहेगा और इसे प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • जहां स्कूल, ऑनलाइन कक्षाएं संचालित कर रहे हैं और कुछ छात्र शारीरिक रूप से उपस्थित होने के बजाय ऑनलाइन कक्षाओं में भाग लेना पसंद कर रहे हैं, वहां उन्हें ऐसा करने की अनुमति दी जा सकती है।
  • छात्र सिर्फ अभिभावकों की लिखित सहमति से ही स्कूलों/संस्थानों में उपस्थित हो सकते हैं।
  • उपस्थिति को जबरन लागू नहीं किया जाना चाहिए और ये पूरी तरह से माता-पिता की सहमति पर निर्भर होनी चाहिए।
  • शिक्षा मंत्रालय (भारत सरकार) के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) द्वारा जारी की जाने वाली मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के आधार पर स्कूलों/संस्थानों को फिर से खोलने के लिए स्वास्थ्य/सुरक्षा संबंधी सावधानियों के संबंध में राज्य/केंद्र शासित प्रदेश स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अपनी-अपनी एसओपी तैयार करेंगे।
  • जिन स्कूलों को खोलने की अनुमति दी जाएगी उन्हें राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा विभागों द्वारा जारी की जाने वाली एसओपी का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा।
  • शिक्षा मंत्रालय का उच्च शिक्षा विभाग (डीएचई) स्थिति के आकलन के आधार पर गृह मंत्रालय (एमएचए) के साथ परामर्श करके कॉलेजों/उच्च शिक्षा संस्थानों को खोलने के समय को लेकर निर्णय ले सकता है। ऑनलाइन/डिस्टेंस लर्निंग, शिक्षण का पसंदीदा तरीका बना रहेगा और इसे प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • हालांकि, ऐसे शोध विद्यार्थियों (पीएचडी) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विषय में स्नातकोत्तर छात्रों जिन्हें प्रयोगशाला/प्रायोगिक कार्यों की आवश्यकता होती है उनके लिए ही उच्च शिक्षा संस्थानों को 15 अक्टूबर, 2020 से इस प्रकार खोलने की अनुमति होगी:
  1. केंद्रीय रूप से वित्तपोषित उच्च शिक्षा संस्थानों में, संस्थान के प्रमुख खुद को इस बात के प्रति संतुष्ट करेंगे कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विषय में शोध विद्यार्थियों (पीएचडी) और स्नातकोत्तर छात्रों को प्रयोगशाला/प्रायोगिक कार्यों की सच में जरूरत है या नहीं।
  2. अन्य सभी उच्च शिक्षा संस्थान, जैसे- राज्य विश्वविद्यालय, निजी विश्वविद्यालय आदि, वे केवल संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों द्वारा लिए जाने वाले निर्णय के अनुसार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विषय में शोध विद्यार्थियों (पीएचडी) और स्नातकोत्तर छात्रों के लिए प्रयोगशाला/प्रायोगिक कार्यों की जरूरत होने पर ही संस्थान खोल सकते हैं।

लोगों के एकत्रित होने से संबंधित नियम

  • कंटेनमेंट जोन के बाहर वाले क्षेत्रों में किसी भी सामाजिक, अकादमिक, खेल, मनोरंजन, सांस्कृतिक, धार्मिक या राजनीतिक गतिविधियों के आयोजनों के लिए 100 व्यक्तियों के साथ आयोजन की अनुमति पहले ही दी जा चुकी है। अब राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को कंटेनमेंट जोन के बाहर 15 अक्टूबर के बाद से 100 व्यक्तियों से ज्यादा संख्या के साथ ऐसे आयोजनों की निश्चित शर्तों के साथ अनुमति देने की रियायत दी जा रही है।
  • बंद परिसरों में 100 व्यक्तियों के साथ कार्यक्रम का आयोजन किया जा सकता है बशर्ते हॉल में उपस्थित लोगों की संख्या कुल क्षमता से 50 प्रतिशत से अधिक न हो, चेहरे पर मास्क पहनना और सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करना, थर्मल स्कैनिंग और हाथ धोने के लिए हैंड वॉश या सैनिटाइजर का प्रबंध अनिवार्य रूप से किया जाए।
  • खुले स्थानों में मैदान या परिसर के आकार को ध्यान में रखते हुए सामाजिक दूरी, चेहरे पर मास्क, थर्मल स्कैनिंग और हैंडवाश व सैनिटाइजर की उपलब्धता के साथ कड़ी निगरानी के बीच अनुमति दी जा सकती है।

यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ऐसे आयोजनों से कोविड-19 का संक्रमण नहीं फैलेगा। राज्य तथा केंद्र शासित सरकारों को भीड़-भाड़ या सामाजिक आयोजनों के नियमन हेतु विस्तृत एसओपी जारी करनी होगी और उसका सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।

  • कंटेनमेंट जोन के बाहर निम्नलिखित को छोड़कर सभी प्रकार की गतिविधियां करने की अनुमति प्रदान की गई है:

(i) यात्रियों की अंतर्राष्ट्रीय हवाई यात्रा जैसा कि गृह मंत्रालय द्वारा अनुमति दी गई है, को छोड़कर।

  • 31 अक्टूबर, 2020 तक कंटेनमेंट जोन में लॉकडाउन का पालन कठोरता के साथ किया जाएगा।
  • संचरण की श्रृंखला को प्रभावी रूप से तोड़ने के उद्देश्य से, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए, जिला प्राधिकरणों द्वारा सूक्ष्म स्तर पर कंटेनमेंट जोनों का सीमांकन किया जाएगा। इन कंटेनमेंट जोनों में महामारी के नियंत्रण संबंधी उपाय सख्ती से लागू किए जाएंगे और केवल आवश्यक गतिविधियों को ही अनुमति प्रदान की जाएगी।
  • कंटेनमेंट जोनों के अंदर, सख्त परिधि नियंत्रण को जारी रखा जाएगा और केवल आवश्यक गतिविधियों को ही अनुमति प्रदान की जाएगी।
  • इन कंटेनमेंट जोनों को संबंधित जिला कलेक्टरों की वेबसाइटों पर और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अधिसूचित किया जाएगा और सूचनाओं को एमओएफडब्ल्यू के साथ भी साझा किया जाएगा।

       राज्यों द्वारा कंटेनमेंट जोनों के बाहर किसी भी प्रकार का स्थानीय लॉकडाउन लागू नहीं किया जाएगा।

  • राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की सरकारें, केंद्र सरकार के साथ पूर्व परामर्श किए बिना, कंटेनमेंट जोनों के बाहर किसी प्रकार की स्थानीय लॉकडाउन (राज्य/जिला/उप-मंडल/शहर/ग्राम स्तर पर) लागू नहीं करेंगी।

अंतर्राज्यीय एवं राज्य के भीतर आवाजाही पर प्रतिबंध नहीं

• व्यक्तियों एवं वस्तुओं की अंतर्राज्यीय एवं राज्य के भीतर आवाजाही पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। ऐसी आवाजाहियों के लिए अलग से किसी अनुमति/अनुमोदन/ई-परमिट की आवश्यकता नहीं होगी।

कोविड-19 प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय निर्देश

• कोविड-19 प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय निर्देश जारी रहेंगे जिसका अनुपालन सोशल डिस्टेंसिंग सुनिश्चित करने के लिए देश भर में किया जाएगा। दुकानों को ग्राहकों के बीच समुचित सोशल डिस्टेंसिंग बनाये रखना सुनिश्चित करना होगा। गृह मंत्रालय राष्ट्रीय निर्देशों के प्रभावी कार्यान्वयन की निगरानी करेगा।

अतिसंवेदनशील व्यक्तियों के लिए सुरक्षा

• अतिसंवेदनशील व्यक्तियों अर्थात 65 वर्ष की उम्र से अधिक आयु के व्यक्तियों, पहले से ही अन्य रोगों से ग्रसित व्यक्तियों, गर्भवती महिलाओं तथा 10 वर्ष की उम्र से कम आयु वाले बच्चों को अनिवार्य आवश्यकताओं एवं स्वास्थ्य प्रयोजनों के अतिरिक्त, घर पर ही रहने का परामर्श दिया जाता है।

आरोग्य सेतु का उपयोग

• आरोग्य सेतु मोबाइल ऐप्लिकेशन के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाना जारी रहेगा।

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