फिदेल कास्त्रो का निधन

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हवाना। क्यूबा के क्रांतिकारी नेता फिदेल कास्त्रो का कल निधन हो गया। वह 90 वर्ष के थे। कास्त्रो ने अमेरिका की नाक के नीचे अपने देश में कम्युनिस्ट राज्य की स्थापना की थी और उनको अपदस्थ करने के अमेरिका के पांच दशक के प्रयास को नाकाम किया था।
उनके निधन की जानकारी उनके भाई एवं क्यूबा के राष्ट्रपति राल कास्त्रो ने दी है।
बीसवीं शताब्दी के उत्तराद्र्ध में विश्व के शिखर नेताओं में अग्रणी फिदेल कास्त्रो का स्वास्थ्य काफी खराब था और पेट की बीमारी ने 2006 में उन्हें लगभग समाप्त कर दिया था। इसके दो वर्ष बाद उन्होंने सत्ता की बागडोर औपचारिक रूप मे अपने भाई को सौंप दी थी।
सेना की पोशाक पहने राष्ट्रपति राल कास्त्रो ने रात 10 बजकर 29 मिनट पर टेलीविजन पर अपने बड़े भाई के देहान्त की घोषणा की थी। उन्होंने उनकी मृत्यु का कारण नहीं बताया। उनके शब्द थे कि क्यूबा की क्रांति के चीफ कमान्डर फिदेल कास्त्रो का देहान्त हो गया।
फिदेल कास्त्रो 1959 की क्रांति के बाद सत्ता में आये थे और उन्होंने 49 वर्ष तक आने देश पर शासन किया। वह करिश्माई व्यक्तित्व के थे। उन्होंने दृढ़ इच्छा शक्ति का परिचय दिया और शीतयुद्ध के समय में भी केन्द्र बिन्दु बने रहे।
अमेरिका तथा उनके सहयोगी देशों ने उनकी भत्र्सना की लेकिन पूरी दुनिया के वामपंथी उनके प्रशंसक बने रहे। लातिन अमेरिका तथा अफ्रीका की समाजवादी क्रांति में भी उनकी सराहना हुई।

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